प्रदेश कार्य समिति विश्वासस व्यक्त करती है, कि भारतीय
जनता पार्टी देश का एकमात्र ऐसा राजनीतिक संगठन है जिसकी अपनी एक जन अभिमुख
कार्यशैली है। यही वो बात है जो हमकों अन्यों से अलग पहचान देकर और स्थायी की
विस्तार की ओर ले जाती है। भारतीय जनता पार्टी संगठन अपनी रीति-नीति के
प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ज्वलंत समस्याओं से सरोकार रखने वाली योजनाओं को भी
अंतिम व्यक्ति तक ले जाने में सरकार के साथ सहज प्रयास करता है। संगठन की इसी पहल
को आगे बढ़ाते हुए जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों के लिए किये
जा रहें सरकारी प्रयासों को जनता के हर तबके तक पहुंचाने के लिए गंभीर प्रयास कर
अपने दायित्व को आकार देने में विश्वास व्यक्त करता है। इससे परंपरागत ऊर्जा संसाधनों
जैसे – कोयला, पेट्रोल और लकड़ी के घटते
भंडारों के भावी संकट से निपटा जा सकेंगा। मध्यप्रदेश सरकार वैकल्पिक ऊर्जा
स्त्रोतों के विकास पर मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के माध्यम से पूरे प्रदेश में
गहन वैकल्पिक ऊर्जा विकास के कार्यक्रम चला रही है। जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ की
प्रदेश कार्य समिति मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के साथ समन्वय बिठाकर अपने
उद्देश्य को आकार देने का संकल्प व्यक्त करती है।
वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों में जैव ऊर्जा (बायोमास ऊर्जा)
के संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश अपने भीतर अपार संभावनाएं समेटे हुए है।
मध्यप्रदेश पशु संसाधनों के हिसाब से देश के अग्रनी राज्यों में शामिल है। प्रदेश
में पशुओं की संख्या 3 करोड़ 40 लाख से ऊपर है, जो प्रदेश की मानवीय जनसंख्या के
लगभग आधी है। प्रदेश में मौजूद इस पशुधन से प्राप्त गोबर और पोल्ट्री फॉर्मों व
सुअर बाड़ों से प्राप्त पशु विष्टा से ही अकेले 77 प्रतिशत प्रदेश के ग्रमीण अंचल
की विद्युत आपूर्ती की जा सकती है। बस आवश्यकता है इसके पर्याप्त दोहन को दिशा
देकर कार्यक्रम को एक आन्दोलन के तौर चलाने की। जैव ऊर्जा का उत्पादन एक बहुआयामी
लाभ वाला है। इससे एक ओर सस्ती बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था होती है तो दूसरी ओर
जैविक खाद मिलने के साथ-साथ पर्यावरण को भी हानि से बचाया जा सकता है। मध्यप्रदेश
ऊर्जा विकास निगम गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए अनुदान देकर अनेक प्रोत्साहन
योजनाएं चला रहा है। भोपाल के भदभदा रोड स्थित शासकीय पशुपालन केन्द्र में एक मॉडल
बायोगैस प्लांट विकसित किया गया है।
पशु विष्टा के अलावा मध्यप्रदेश वनस्पति बायोमास के
लिहाज से भी एक समृद्ध राज्य है। मध्यप्रदेश एक सोयाबीन राज्य होने के नाते प्रदेश
में सोयाबीन की भूसी बायोमास के तौर पर हमें एक बड़ा संसाधन उपलब्ध कराती है। निगम
के सहयोग से मध्यप्रदेश में भूसी आधारित विद्युत प्लांट जदुखेड़ा जिला धार में
लगाया गया है। निगम के प्रयासों से बैतूल जिले के ग्राम कसई को बायोमास से बिजली
उत्पन्न करने वाला देश का पहला गांव बनेने का गौरव हांसिल हुआ है। मध्यप्रदेश में
जट्रोफा से बायो फ्यूल बनाने का 10 किलोवाट का प्लांट बांसगढ़ी जिला मंडला में
लगाया गया है।
भारत में वनों की दृष्टि से मध्यप्रदेश पहले स्थान पर
है। प्रदेश के लगभग 31.1 फीसदी क्षेत्रफल पर वन है। प्रदेश के वन क्षेत्र में अधिक
जैव ऊर्जा देने वाली झाड़ियों को रोपित कर ( ऊर्जा की खेती) बायोमास के संसाधन को
बढ़ाया जा सकता है। जल कुम्भी भी जैव ऊर्जा के उत्पादन के लिए बायोमास उपलब्ध
कराने में एक अहम रोल अदा कर सकती है। बस आवश्यकता है इसका एकत्रीकरण कर उपयोग
करने की। उत्तरी मध्यप्रदेश अर्थात् मध्यभारत के ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना और
श्योपुर कला जिलों में गन्ने की खेती का केन्द्रीयकरण है। यहां गन्ने की खोई को
बायोमास के तौर पर वृहत स्तर पर उपयोग कर जैव ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है।
ग्वालियर और मुरैना में गन्ने की बगास अर्थात् गन्ने की खोई से बिजली उत्पादन किया
जा रहा है।
शहरी कचरा और नगरीय क्षेत्रों में मानवीय मल-मूत्र भी बायोमास की संभावनाएं
खोलता है। प्रदेश में शहरी कचरे से बिजली बनाने का एकमात्र प्लांट भोपाल में है।
इनके प्लांटों की संख्या और लगाकर जैव ऊर्जा के दोहन की पहल बड़े पैमाने पर की जा
सकती है।
जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ के कार्यों का विस्तार करके
वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के प्रचार-प्रसार तक किया जाय तो
अच्छा रहेगा। इनकी प्रदेश में अधिकतम संभावनाएं है। पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के
संसाधनों के विकास के लिए मध्यप्रदेश एक आन्दोलनात्मक पहल कर रही है। जिसके अच्छे
परिणाम भी आ रहे है। उत्तर-पश्चिमी मध्यप्रदेश के जिले- मंदसौर, नीमच, रतलाम,
देवास और इंदौर में जहां वायु गति की गति 12 किमी प्रति घंटे से अधिक है, पवन
ऊर्जा की अच्छी संभावनाएं है। इन जिलों मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों से पवन ऊर्जा
का लोग बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे है।
मध्यप्रदेश सरकार के इन्हीं गंभीर
प्रयासों के कारण आज मध्यप्रदेश पवन ऊर्जा का दोहन करने वाले राज्यों में देश में
पहले स्थान पर है। प्रदेश में पवन ऊर्जा का उपयोग किसान बिजली बनाने और सिंचाई के
लिए कर रहे है। इंदौर प्रदेश में सबसे अधिक पवन चक्कियां उपयोग करने वाला जिला बन
गया है। देश की पहली संयुक्त क्षेत्र की कंपनी मध्यप्रदेश विण्ड फॉर्म मध्यप्रदेश
में गठित की गई है। निगम के प्रयासों से गुना और मंदसौर जिलों में विण्ड मॉनिटरिंग
कार्यक्रम विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। निगम के सहयोग से मध्यप्रदेश का सबसे
बड़ा पवन ऊर्जा क्षेत्र देवास जिले के जामगोदरानी क्षेत्र स्थापित किया गया है।
सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा
विकास निगम वित्तीय और तकनीकी मदद देने के साथ-साथ अनुदान भी दे रहा है। जिसके
अच्छे परिणाम सामने आये है। सोलर फोटो वोल्टिक प्लांटों से 300 वाट तक बिजली
प्राप्त की जा सकती है। सौर तापीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा
विकास निगम सोलर कुकर को प्रोत्साहन देने एक आंदोलन के तौर चला रहा है। सोलर ऊर्जा
से डिस्टिल वाटर और सार्वजनिक स्थानों-संस्थाओं में स्नान करने प्लांट लगाने का भी
काम तेज गति से कर रही है। अनेक सौर ऊर्जा ग्राम स्थापित किए जा रहे हैं। निगम की
सहायता से विश्व का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा प्लांट इटारसी में लगाया गया है।
नरसिंहगढ़ में भी एक बड़ा सौर ऊर्जा प्लांट बिजली उत्पादन कर रहा है। इसके
अतिरिक्त निजी क्षेत्र में अनेकों सौर ऊर्जा प्लांट काम कर रहे है। निगम के
प्रयासों से आदिवासी जिले झाबुआ और अलीराजपुर में सबसे अधिक सौर ऊर्जा का उपयोग
किया जा रहा है। निगम के सहयोग से इंदौर जिले के कस्तूरबा ग्राम को पूरी तरह सौर
ऊर्जा पर निर्भर गांव बनाया जा रहा है। निगम के ही सहयोग से ही भोपाल में सौर
ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोर लगाया जा रहा है।
वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों के भोपाल में वैकल्पिक विद्युत
ऊर्जा अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया गया है। प्रशासनिक अकादमी भोपाल, देवी
अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर और अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान संस्थान महू में
वैकल्पिक ऊर्जा उद्यान अनुसंधान और विकास केन्द्र स्थापित किये गये हैं।ग्रामीण अंचल की महिलाओं को धुंए के चूल्हों से होने वाली स्वास्थ्य की हानि
से बचाने के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम उन्नत चूल्हा कार्यक्रम चला रहा है।
जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ प्रदेश में मौजूद इन्ही अपार
संभावनाओं के मद्देनजर प्रदेश के ग्रमीण अंचल में जैव ऊर्जा को बढ़ावा और
प्रोत्साहन देने के लिए एक मित्र और मार्ग दर्शक के तौर पर सरकार और जनता के बीच
एक समन्वयक की भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त करता है।
जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ
प्रदेश सरकार के अटल ज्योति अभियान में अपनी भागीदारी का संकल्प व्यक्त करती है।
जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान के
द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का ही नतीजा है, आज प्रदेश के ग्रमीण अंचल को 24 घंटे
बिजली मिल रही है और किसानों को दस घंटे सिंचाई के लिए भरपूर बिजली मिल रही है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि बिजली किसी देश या प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धमनियों में
बहने वाले जीवन रक्त (लाइफ ब्लड) के समान है।
शिवराज सिंह चौहान सरकार के गंभीर
प्रयासों का ही नतीजा है। आज मध्यप्रदेश एक बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकल
एक प्रगतिशील जुझारू राज्य बन गया है। मध्यप्रदेश आज औधौगिक रूप से विकसित राज्यों
महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु जैसे राज्यों के साथ कदम ताल करते हुए एक सुचारू
राज्य बनने की ओर अपने तेज कदम बढ़ा रहा है। भाजपा सरकार के ही समन्वित गंभीर
प्रयासों का नतीजा है। आज मध्य प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर (सकल घरेलू उत्पाद की)
10.2 प्रतिशत को छू रही है। जैव ऊर्जा विकास प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्य समिति मप्र
सरकार की इन्हीं लोकप्रिय नीतियों की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने का
संकल्प व्यक्त करती है।
1. संचालन- दिनेश साहू, प्रदेश कार्यालय मंत्री, जैव
ऊर्जा प्रकोष्ठ, मप्र
2. दीप प्रज्जवलन- माननीय
प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर जी, माननीय संगठन महामंत्री
अरविन्द मेनन जी और
मप्र ऊर्जी विकास निगम के अध्यक्ष विजेन्द्र सिंह सिसौदिया द्वारा
3. स्वागत- मुख्य अतिथियों का स्वागत
dinesh sahu
4. प्रदेश संयोजक, जैव ऊर्जा
प्रकोष्ठ, शैलेष केसरवानी जी का उदबोधन - प्रकोष्ठ की कार्य
योजना, जिला
संयोजकों को प्रकोष्ठ की जिला कार्य समितियों के गठन पर मार्ग दर्शन और
बैठक में रखे जाने
वाले कार्य समिति प्रस्ताव को प्रस्तुत करवाना
5. कार्य समिति प्रस्ताव का
प्रस्तुतिकरण - दो सदस्यों द्वारा प्रस्तुत, नाम और पद सहित
हस्ताक्षर
6. मप्र ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष, माननीय विजेन्द्र सिंह सिसौदिया जी का
उदबोधन- निगम की सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनसे कैसे जनता को लाभ पहुंचाया जा सकता है।
7. भोजन अवकाश
दूसरा सत्र –
8. कार्य समिति प्रस्ताव पारित करवाना- दो सदस्यों के द्वारा समर्थन करवाकर, नाम और पद
सहित हस्ताक्षर
9. माननीय संगठन महामंत्री, अरविन्द मेनन
जी का मार्गदर्शन
10. समापन उदबोधन- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष माननीय नरेन्द्र सिंह तोमर जी
द्वाराइदम राष्ट्राय स्वा: , इदम राष्ट्राय, इदम न मम् !
To ....................................
....................................
.....................................
बंधुवर...! आपको जिला अध्यक्ष
के अनुमोदन के उपरांत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष माननीय नरेन्द्र सिंह तोमर जी और
प्रदेश संगठन महामंत्री माननीय अरविन्द मेनन जी की सहमति से भाजपा जैव ऊर्जा
प्रकोष्ठ मध्यप्रदेश का....................................
नियुक्त किया गया
है।
आशा है आप पार्टी
की रीति-नीति और विचारधारा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ प्रकोष्ठ के कार्यों को
जन-जन तक ले जाने में अपने दायित्व का निर्वहन निष्ठापूर्वक प्रतिबद्धता के साथ
करेंगे।
सुझाव: भोपाल
बी.आर.टी.एस. कॉरिडोर पर चलने वाली बस कानया नाम?
हिन्दुस्तान का धड़कता दिल है, मध्यप्रदेश। और
उसका मुकुट बनने का मौका मिला भोपाल को। सबसे बढ़कर झीलों की नगरी भोपाल को। भारत
का लुर्सन कहलाने का गौरव हांसिल है। तेज गति से दौड़ते विकास के इस दौर में।
हमारी राजधानी भी अछूती नहीं है। हॉल ही के वर्षों में। इस शहर ने भी। विकास और
सुंदरता के नये आयाम छुएं हैं। और अब। नवनिर्मित बी.आर.टी.एस. पर हर तीन मिनट में।
सिटी परिवहन की सुविधा देकर।
सरकार। इस शहर के माथे पर नयी ऊंचाईयां लिखने जा रही
है। कॉरिडोर पर चलने वाली इन बसों के नाम रखने को लेकर। नागरिकों से सुझाव मंगायें
गये हैं। मैं । भोपाल कॉरिडोर पर चलने वाली इन बसों का नाम लुर्सन सिटी
एक्सप्रेस रखने का सुझाव देना चाहूंगा। इसके पक्ष में मेरे 11 तर्क पेश है :-
1.लुर्सन विश्व का सबसे सुंदर शहरों में से
एक है। ये सिटी यहां पाये जाने तालाबों के
कारण सुंदर और सुरम्य आकार लिए हुए है। ऊंची-नींची पहाड़ियों पर बसी झीलों की नगरी
भोपाल को भी भारत का लुर्सन कहलाने का गौरव हांसिल है।
2.लुर्सन नाम हमारे शहर के तालाबों को बचाने
और उनके संरक्षण के लिए हमें प्रेरणा देता रहेगा।
3.ग्लोबल सिटी बनने की ओर कदम बढ़ाती हमारी
भोपाल सिटी। लुर्सन नाम चर्चित होने के बाद। हमें भोपाल को लुर्सन के समान सुंदर,
हराभरा, नियोजित, साफ सुथरा और अनुशासित शहर बनाने के संकल्प की हर पल याद दिलाता
रहेगा।
4.मैने देश अनेक शहर देंखे। मगर मुझे कोई
शहर नहीं भाया। बस अपना लुर्सन ही सबसे बेहतर लगा। शायद इसी कारण। आज भोपाल देश
में सबसे पसंदीदा शहर बन गया है। इसी के चलते शहर में रियल स्टेट के दाम आसमान छू
रहे है। हर कोई भोपाल में बसना चाहता है।
5.अन्य शहरों के तुलना में। राजधानी में
लूटपाट, चोरी-चकाड़ी, जेब कतराई, यात्रियों को गुमराह करने वाली चिरकुटाई जैस
दैनिक अपराध ना के बराबर है। जो हमारे शहर के व्यक्तित्व को सुंदर बनाते है।
6.राजा भोज की सुंदर समृद्ध संस्कृति की
अमिट छाप भी हमें पीढ़ी-दर पीढ़ी संस्कारों का मार्ग दिखाती रहेंगी। ज्ञान। जो
सबसे सुंदर है। राजा भोज उसके सबसे उपासक थे। माँ सरस्वती, वागदेवी उनकी आराध्य थी।
वहीं नवाबों की रियासत रहे। इस शहर पर मुगल कला के साथ-साथ। तहजीब का विशेष प्रभाव।
आज भी शहर को एक अलग पहचान दे रहा है। बस यहीं भाई-चारे और आपसी मेलजोल की ये
सुंदरता। हमें कोई सुंदर नाम रखने के लिए विवश करती है। और उचित भी है। क्योंकि
सत्य ही सुंदर है। बाकी सब झूठा। और यहीं वो हमारी धरोहर है। जो निरंतर पर्यटकों
को भोपाल आने के लिए लालायित करती रहेंगी।
7.लुर्सन नाम को पब्लिसिटी देकर। हम भोपाल
के नागरिकों को। हमारे शहर को लुर्सन के समान सुंदर बनाने के लिए। संकल्प दिला
सकते है। हर व्यक्ति को एक पौधा लगाकर। शहर को सुंदर बनाने की शपथ दिला सकते है।
जनता के साथ सरकार को भी। प्लांटेशन के लिए। शहर में युद्ध स्तर पर एक अभियान
चलाना चाहिये। इससे कॉरिडोर बनाते समय हुए। पेड़-पौधों के विनाश की पूर्ति भी
होगी। क्योंकि शहर में कॉरिडोर तो बन गया। लेकिन हमारे शहर की। पहले वाली हरियाली
गायब होने के बाद। शहर उजाड़-वावरा लग रहा है। हरियाली की पूर्ती और किसी के लिए
नहीं। हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी है।
8.सरकार। झीलों के शहर लुर्सन को सामने रख।
विस्तारित हो रहे शहर में। नये तालाबों के बनाने का प्रोजेक्ट चलाने के लिए।
प्रेरणा ले सकती है। इससे शहर सुंदर और रमणीय बनेगा।
9.भोपाल के विकास। या सुंदरता की बात हो। और
नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर का नाम। याद ना किया जाय तो। बेमानी सा लगता है।
गौर साहब के। इस सुंदर शहर को। सुंदर बनाने के सुंदर सपने। और सुंदर प्रयास।
नगर
को पेरिस बनाने का। उनका सपना। और अब सुनने में आ रहा है। भोपाल को मेट्रो ट्रेन
देकर ही गौर साहब राजनीति से सन्यास लेंगे। हमारे नगरीय प्रशासन मंत्री के। इन
सुंदर विचारों को। सुंदर आकार देने के लिए। शहर के सुंदर परिवहन का नाम भी। सुंदर
ही होना चाहिये। ऐसे में। राजधानी के बी.आर.टी.एस. पर दौड़ने वाली। इन बसों का
नाम। लुर्सन सिटी एक्सप्रेस ही बेहतर रहेगा। जो हमारे शहर को सुंदर और सुरम्य
बनाने के लिए। हर पल प्रेरित करता रहेगा।
10.कहते है। एक जूनियर के लिए। उसके सीनियर
के घर से अच्छा। कोई ट्रेनिंग सेंटर नहीं होता। शायद यही वो बात है। जो हमारे शहर
की महापैर। श्रीमती कृष्णा गौर को प्रेरित करती है। महापौर कृष्णा गौर भी। विगत
चार सालों से। शहर को सुंदर आकार देने में। कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। गौर
साहब की भावी उत्तराधिकारी। कृष्णा गौर को भी। बी.आर.टी.एस. बसों का ये नाम। शहर
को। लुर्सन सिटी की तरह सुंदर बनाने के लिए। आगे भी प्रेरित करता रहेगा।
11.सबसे बढ़कर। हमें इन बसों में चलने वाले
यात्रियों के साथ। स्टाफ के द्वारा किये जाने वाला व्यवहार। भी सुंदर बनाकर। यहां
आने वाले। रहने वाले। लोगों को एक सुंदर संदेश देना होगा। ताकि। शहर की तहजीब की
चर्चा। दूसरे शहरों में हो।
देखने में आया है। पहले जब पर्पल बसे नहीं थी। तब
प्रायवेट बस वाले। यात्रियों से बहुत ज्यादा। बदतमीजी करते थे। लेकिन जैसे ही। ये
लाल बसे आयी। प्रतिस्पर्धा बढ़ी। उनकी सवारी कम हुई। तो प्राइवेट बस वालों का
व्यवहार। जनता से मधुर हो गया। अब इसका दूसरा दुखद पहलू सामने आया है। अब लाल बस
वाले जनता से दुर्व्यवहार कर रहे है। यहां तक की। हाथ उठाने में भी देर नहीं
लगाते। सुंदर संस्कारों के। इस शहर में। सभी के सम्मान की रक्षा भी सुंदर होना
चाहिये।
(
इदम् राष्ट्राय स्वा:, इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम्)
अन्ना के आंदोलन की विफलता ने हथेली पर खींची
निराशा की गहरी लकीर
कामयाबी को चूमती और अधिकार सम्पन्न होती बेटियां
ना छोड़े संस्कारों का दामन
युवा, गीता पाठ से शुरू करें दिन की शुरूआत
लो उग आया नये साल का सूरज। आज फिर आया हमारे
पीछे-आगे के आंकलन का दिन। ये सुबह आज हमसे कुछ मांग रही है। वो हमे बहुत कुछ देना
भी चाहती है। जिससे हमारे समाज, देश और जीवन में शुभ मंगलमय हो...। इस नव वर्ष के
आगमन पर भारतीय समाज करवट लेने कराह रहा है। महंगाई की मार ने उसे अधमरा बना दिया
है। पूंजीवादी विषधर उसे जकड़ रहा है। भ्रष्टाचार के शोर ने उसे बहरा बना दिया है।
उसे कुछ सूझ नहीं रहा है। सच टटोलना उसके बूते से बाहर होता जा रहा है। ये हमारे
सौभाग्य की बात हैं। आज हम लोकतंत्र की छाया में जी रहे हैं। यहीं वो लौ है, जो
हमें नवजीवन की राह दिखा सकती है। हम
हमारे एक वोट के बल पर आने वाले दो सालों में परेशानियों में काफी हद तक कमी ला
सकते हैं।
अन्ना के समाज सेवी आंदोलन ने देश को एकजुट कर देश
को आशा से सराबोर कर दिया था। मगर आंदोलन के सदस्यों की निजी महत्वाकांक्षाओं ने
इसे ले डूबा। इस विफलता ने देश की हथेली पर एक गहरी ऱेखा खींच दी है। इसका छोर अब
और लंबा हो गया है। जो दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। पता नहीं अपनों गुलामी से
छुटकारा दिलाने अब अगले अन्ना कब आयेंगे। देश का यही वो पीकअप समय था। जहां से हम
हमारे नेताओं को जन ताकत का एहसास दिला सकते थें। भ्रष्टाचार और महंगाई को लगाम
डाल सकते थे। आर्थिक गुलामी धमका सकते थे। लेकन अब वो समय हमारे हाथ से निकल गया
है। और अब हमारे सामने फिर गहरा काला अंधेरा छा गया है। समय ने अन्ना को चुना था।
लेकिन वे भी मानवीय मोह से ऊपर नहीं उठ पाये। वे इस बात को नहीं समझ पाये कि बिना
अर्जुन के महाभारत नहीं जीता सकता। आत्म विश्वास और ऊर्जा से सराबोर अरविंद
केजरीवाल के सिर पर हाथ ही रखे रहते तो आने वाले समय की तस्वीर अलग होती। अब तो
टीम के लोग एक दूसरे पर वार करने से भी नहीं चूक रहे हैं।नये साल की इस पूर्व संध्या पर हमारे मन में एक
सवाल कौंध रहा है। क्या इन विषम परिस्थितियों में देश को एक हिट एण्ड रन की जरूरत
है। त्रस्त जनता अंदर से ये सोच भी रही हैं। और आप (आम आदमी पार्टी)
की अपनी सरकार बना सकती है। इसमें अप्रत्याशित जैसा कुछ भी नहीं होगा। युवा इसमें
अहम रोल निभा सकते है। बस जरूरत है तो मिलकर एक छक्का मारने की।
बदलाव से मुक्ति
नहीं तो कम से कम भ्रष्टाचार सहमेगा तो जरूर। माहोल तो बनेगा। मौजूदा दलों से तो
ऐसी आशा भी करना अपने आपको धोखा देने से कम नहीं है। बेटियां आज हर क्षेत्र में उड़ान भर रही हैं। वे
लगातार अधिकार सम्पन्न हो रही हैं। हमारे नेताओं में नारी हितैषी कहलाने की जमकर होड़
लगी हैं। नारी को बराबरी का कानूनी दर्जा देने की इस आपाधापी में। अधिकारों के
हस्तांतरण के साथ संस्कारों के दायित्व का ध्यान दिलाने की जोहमत कोई भी नहीं उठा
रहा है। अब इस दायित्व को निभाने का भार भी बेटियों के कंधों पर आ गया है। हमें इस
बात को नहीं भूलना चाहियें। परिवार एक साइकिल की तरह है। इसका अगला पहिया पुरूष तो
पिछला नारी है। दोनों को अगर बराबरी में लगा दिया जाये, तो साइकिल का विकृत रूप
सामने आयेगा। और साइकिल का चलना मुश्किल हो जायेगा। पिछला पहिया जब तक अगले के
पीछे चलने को राजी नहीं होगा, तब तक साइकिल आगे नहीं बढ़ेगी। और यही वेदों का सत्य
है। परिवार कानून या प्रतिस्पर्धा से नहीं चलते। लाइन एक दूसरे के पीछे चलने से
बनती है। मान सम्मान, आदर सत्कार से बनती है। कानून अंतिम रूप से परिस्थिती विशेष
के लिए होते है। प्रतिस्पर्धा आर्थिक आजीविका मजबूत बनाने के लिए होती है। जब तक
अधिकारों के हस्तांतरण के साथ-साथ नारी संस्कारों को हस्तांतरित नहीं किया जाता।
तब तक हम कह सकते है कि हम एक अंधकार से निकल कर दूसरे अंधेरे की ओर ही बढ़ रहे
हैं।
बिना जीवन दर्शन के जीवन नीरस और दुखों से भरा
होता है। यदि हमें अपना रास्ता पहले से मालूम हो तो राहें आसान हो सकती है। गीता
आत्मा, परमात्मा और प्रकृति में तारतम्य बिठाने का सार है। इसका पाठ करके आप जीवन
को सुलभ बना सकते है। उदार, मानवीय व्यक्तित्व के धनी बन सकते हैं। संयम, निडर
होकर दुखों का सामना कर सकते है। गीती ज्ञान किसी अनहोनी को रोक सकती है। आपके हाथ
बुरा नहीं होने देती। मेरा विचार है, युवाओं को अपने शिक्षा काल में इस श्रेष्ठतम्
जीवन दर्शन को अपने भीतर उतार लेना चाहिए। बस आवश्यकता इस बात की है। प्रति दिन
गीता दो पेज का पाठ करें। लेकिन पूजा के साथ इत्मीनान से। हबड़दबड़ में नहीं। तो
जीवन में किसी प्रकार का भटकाव या संकट पास भी नहीं आयेगा। अगर आयेगा भी तो उससे
आसानी से निपटा जा सकेंगा।
देशवासियों के जीवन में नववर्ष
मंगलमय हो।.......हम सबके जीवन में नये साल का प्रभात उमंग और उस्साह लेकर आये। .........और हमारी रग-रग
को ऊर्जा से भर दें।.......हम सभी हर कदम पर जीवन संघर्ष में विजयी हो।.......इसी मनोकामना के
साथ........!