Morning Woke Time

Morning Woke Time
See Rising sun & Addopete Life Source of Energy.
Showing posts with label political. Show all posts
Showing posts with label political. Show all posts

Monday, 2 October 2023

विजय संकल्प अभियान, सीधे संपर्क समाज से समर्थन

मुल्ताई -मासोद विधानसभा भावी प्रत्याशी/उम्मीदवार , भाजपा शासन की रीति नीति और लोक कल्याणकारी योजनाओं पर गांव-गांव, रहा-रहा, घर-घर, द्वार-द्वार और खेत-खेत सीधा संपर्क संवाद , सबका साथ, सबका विकास। सबका विश्वास, सबका प्रयास।। बदलते भारत की बात, सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण, हर घर विकास, मध्य प्रदेश विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 129

"पूर्व दृष्टि " 2023 -  विजय प्रवास, "सीधा संपर्क-संवाद"
( " Forcoster "  2023 - victory migration )
मुलताई विधानसभा का एक ब्रांड एंबेसेडर (Brand Ambassador) बनकर पूरी विधानसभा में भाजपा सरकार की रीति नीति और लोक कल्याणकारी योजनाओं की मतदाता जनता जनार्दन से जमीनी स्तर पर आमने-सामने face to face "सीधा संपर्क-संवाद' One To One कर लोगों की समस्याएं सुनना और उन्हें दूर करने के लिए मदद सहयोग करना, उचित परामर्श देना,   निर्देशन करना देना और सरकार की लोक कल्याणकारी जनहित की योजनाओं की जानकारी आम जनता को देना और उसका लाभ लेने की जानकारी देना बात करना सहयोग देना रास्ता बताना।

कृपया विस्तृत जानकारी और सक्रियता के लिए मेरी फेसबुक आईडी ID - Dinesh Sahu Multai सर्च करने की कृपा करें।

कृपया जन जन तक पहुंचने के लिए मेरी फेसबुक पोस्ट शेयर करके मुझे जनप्रतिनिधि बनने के लिए सहयोग करने की कृपा करें। 

भावी MLA विधायक प्रत्याशी
पांव-पांव वाले छोटे भैया के प्रवास की निरंतरता
# जनता जनार्दन से सीधा संपर्क, सबका साथ सबका विकास सबका सहयोग की अवधारणा को लेकर जनता जनार्दन में आगे बढ़ रहा, जनता के बीच में सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की विकसित होती मेरी छवि, साधारण, स्वच्छ और पारदर्शी उच्च शिक्षित संगठन और शासन प्रशासन और पत्रकारिता तथा राजनीति और सार्वजनिक जीवन के निकटतम प्रभावी अनुभवी विधानसभा क्षेत्र से लेकर प्रदेश स्तर तक अंतर्संबंध मुलताई-मासोद विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी के प्रबल उम्मीदवार l मेरा 2017-18 से लेकर अब तक मुलताई-मासोद विधानसभा के  सभी 292 बूथों (259 गांव) पर कम से कम दो बार और आधे से अधिक बूथों पर दो से अधिक बार ( पहली बार 2018 विधानसभा चुनाव के समय स्वयं के द्वारा किया गया प्रवास + दूसरी बार विधानसभा चुनाव 2018 के तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी माननीय राजा पवार जी के साथ पूरी विधानसभा का प्रवास + तीसरी बार ग्राम पंचायत और नगर पालिका मुलताई के आम चुनाव के समय विधानसभा के आधे से अधिक बूथों पर प्रवास  + 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद से मेरा प्रवास विधानसभा में निरंतर जारी रहा और चौथी बार इन मध्य के 3 वर्षों में 2 से अधिक बार मैं विधानसभा के लगभग सभी गांव का प्रवास कर चुका हूं। + पांचवी बार मध्यप्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2023 के मद्देनजर पूरी मुलताई विधानसभा का पांचवी बार द्वार द्वार प्रवास कर रहा हूं। जो आगामी 30 मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। + छठवीं बार मध्यप्रदेश शासन प्रशासन द्वारा निकाली गई मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के साथ साथ छठवीं बार पूरी मुलताई विधानसभा के सभी सूचीबद्ध 259 गांव का प्रवास किया। मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के समापन दिवस 25 फरवरी 2023 को ( मुलताई विधानसभा के सभी 259 गांव 292 बूथ) मेरा छठवां प्रवास पूर्ण हुआ और मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के साथ भाजपा रीति नीति वाली शिवराज सिंह चौहान सरकार की जन उपयोगी लोक कल्याणकारी नीतियों को जनता जनार्दन के पास पहुंचाते हुए मैं मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023,  5 फरवरी से 25 फरवरी 2023 तक निकाली गई मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के इन 20 दिनों में मैं मुलताई विधानसभा के सभी सूचीबद्ध 259 गांव 292 बूथ पर प्रवास करने वाला एकमात्र भाजपा का ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरा और मेरी प्रबल अग्रणी दावेदारी पक्की बनकर सामने आई है। पार्टी द्वारा दिए गए कार्यक्रम के साथ-साथ अब pun: वर्तमान में पहले से चल रहा। घर-घर दस्तक देते हुए डोर टू डोर पांचवी बार 296 बूथों का प्रवास विधानसभा चुनाव 2023 में प्रबल दावेदारी के लिए चल रहा है। द्वार द्वार,घर घर कर रहा हूं। मध्य प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2023 में प्रबल जमीनी स्तर पर दावेदारी के लिए आज दिनांक तक छठवीं बार मुलताई-मासोद विधानसभा के 272/292 बूथों का सघन प्रवास पूरा हो चुका है और आगे प्रवास निरंतर जारी है प्रत्येक बूथ पर 80 परसेंट से अधिक जनता जनार्दन से मिलकर सीधा विस्तृत संपर्क संवाद करता हूं। और अनुमति लेकर योजनाओं और सरकार की नीतियों पर जन इच्छा के वीडियो बनाकर फोटोग्राफ लेते हुए अधिकतम जनता जनार्दन की समस्याओं और उनके द्वारा रखी जाने वाली बातों परेशानी के वीडियो बनाकर और सोशल मीडिया में जारी करता हूं। और पार्टी संगठन तथा शासन और प्रशासन के तक पहुंचाता हूं भेजता हूं। जो सोशल मीडिया के माध्यम से प्रिंट और विजुअल मीडिया तक जाते हैं। मैं मुलताई मासोद विधानसभा का एकमात्र व्यक्ति जिसकी आईडेंटिटी पहचान जनता जनार्दन से सीधी पहचान मुलताई विधानसभा के सभी 292 बूथों पर है। मुलताई मासौद विधानसभा के प्रत्येक गांव और मुलताई नगर पालिका परिषद में मेरी आमजन में प्रभावशाली सक्रिय आईडेंटिटी सार्वजनिक पहचान है । पार्टी को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में विजई बनाने के लिए मैं भाजपा से सर्वोत्तम उम्मीदवार हूं। मतदाता बंधुओं जनता जनार्दन और युवा मतदाताओं का मेरे प्रति जनसमर्थन झुकाव के लिए मैं बहुत-बहुत आभारी हूं। जनता जनार्दन से मेरा विनम्र अनुरोध है मेरी उम्मीदवारी दावेदारी को सशक्त बनाने के लिए मेरे पक्ष में समर्थन आवाज व्यक्त कर मुझे जन सेवा का अवसर देने की कृपा करें। मैं जनता का उम्मीदवार, जनता के लिए, जनता के द्वारा चुना जाने वाला एक योग्य उम्मीदवार हूं। जनता के बीच ही मेरा स्थान है और रहेगा। जनता की सेवा मेरे लिए शिरोधार्य हैं।
# प्रदेश कार्यालय प्रमुख, आर्थिक प्रकोष्ठ, भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश, Please Share Me, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023, विधानसभा मुलताई मासोद से भावी विधायक उम्मीदवार के प्रबल दावेदार, निवासी ग्राम पोस्ट बिहरगांव तहसील प्रभात पट्टन, जिला बैतूल मध्य प्रदेश।

Tuesday, 8 February 2022

उत्तर प्रदेश में जीतेगा योगी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2022
भविष्य में विचारधारा ही रहेगी जिंदा, निष्ठा हो जाएगी गौण विलोपित
            उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2022 में मतदाताओं के मन मस्तिष्क पर बना मनोवैज्ञानिक प्रभाव जीतेगा और योगी की विजय होगी। जहां से 2024 के देश में होने वाले आम चुनाव का रास्ता दिल्ली तक जाता है। लोगों को पहली बार उत्तर प्रदेश में शांति और व्यवस्था का सुकून मिला है एहसास हुआ है। व्यक्ति क्या चाहता है अपने जीवन में बेफिक्र चैन। बिना डर के अपने और मां बहनों के लिए स्वतंत्र जीवन। 
उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ की प्रदेश सरकार ने इसी प्राथमिक कार्य को पहले पूरा किया है l प्रदेश से गुंडाराज दादागिरी रंगदारी और माफियाओं का लगभग पूरा सफाया कर दिया है और लोगों को सुशासन दिया है। योगी जी के इसी महत्वपूर्ण प्राथमिक कार्य ने लोगों के ऊपर एक विशेष चमत्कारिक दूरदर्शी मनोवैज्ञानिक प्रभाव उत्तर प्रदेश की जनता में बनाया है उत्पन्न किया है। उत्तर प्रदेश की जनता जनार्दन भली-भांति समझ रही की योगी एक स्वतंत्र निष्पक्ष और निडर मुख्यमंत्री है जो खुद के लिए नहीं समाज देश प्रदेश और जनता के लिए जीता है। किसी वंश परिवार सुप्रीमो या निजी हित के लिए नहीं। योगी जी की साधारण सरल संत छवि इसकी साक्षी है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी ने प्रदेश में राष्ट्रीय स्वाभिमान और आर्थिक विकास को एक नई गति दी है। भले ही उनके द्वारा उठाए गए आर्थिक विकास के कदम इन 2 वर्षों की लंबे कोरोना काल के कारण डगमगाए हो। लेकिन लोगों को इस पर अधिक एतराज नहीं है। उन्हें इसका अहसास है कि लोकहित के लिए जीने वाले अगले मुख्यमंत्री तो योगी आदित्यनाथ जी ही होना चाहिए होंगे और जनता जनार्दन उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाएगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2022 में निष्ठा सबसे अधिक तेज गति से दरकती विलोपित Eliminate होती नजर आई है। लोगों में निष्ठा अब ज्यादा देर नहीं टिकने वाली है। अब व्यक्ति निजी हित के लिए जीने को मजबूर है या कहो बेईमान है या फिर उसकी महत्वाकांक्षा की भूख बढ़ती जा रही है। भविष्य में केवल विचारधारा ही काम करेगी। निष्ठा गौण हो जाएगी।  निष्ठा बौनी हो जाएगी। लगभग समाप्त प्राय हो जाएगी। विचारधारा ही शासन का क्रियान्वयन और दिशा तय करेगी नेतृत्व करेगी। विचारधारा द्वारा चयन किए गए शासक एक अधिनायक की तरह जन सेवा की गुणवत्ता देते रहेंगे। और विचारधारा को क्रियान्वित करेंगे। नागरिकों को केवल विचारधारा को मजबूत करने के लिए निस्वार्थ सेवा करनी होंगी। देश समाज को मजबूत करने के लिए इसे जनता को अपना एक राष्ट्रीय कर्तव्य समझकर पूरा करना है। सीधे निजी लाभ की जगह हमें केवल राज्य की सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ताओं की आशा करनी होगी।
भारत ही नहीं विश्व की प्रभावशाली शासकों में से एक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के राष्ट्रीय तत्वों को मजबूत करने वाले अहम प्राथमिक कार्यो के कारण भाजपा के पक्ष में मतदान की लहर बनी है। देश में प्रधानमंत्री जी के द्वारा किए जा रहे आर्थिक कार्यों सुधारों और नव निर्माण का मतदाताओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है। मोदी जी की सुरक्षा नीति सैन्य नीति और विदेश नीति के लोग कायल प्रशंसक हो गए हैं। ऐसे अनेक कारण है जिन्होंने जनता के मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव उत्पन्न किया है डाला है। भले ही कमी-बीसी (19-20) कुछ हो। लेकिन मोदी योगी की जुगलबंदी का यही वह मनोवैज्ञानिक प्रभाव है जो पुनः विधानसभा 2022 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को विजय दिलाएगा। योगी जी का परचम लहराएगा। योगी की जय होगी।  विजय होगी। योगी आदित्यनाथ पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। होंगे।

Sunday, 31 October 2021

मेरी उम्र , मेरा मध्य प्रदेश - स्थापना दिवस 1 नवंबर 2021 पर विशेष

1966 से मध्य प्रदेश का मैं साक्षी। मेरी आंखों के सामने बीमारु मध्य प्रदेश ने कैसे गंभीर रुप धारण किया, बढ़ता गया, और ऊंचाइयों की ओर बढ़ता चला जा रहा हैं । 1970 के दशक, सोयाबीन आने के प्रारंभिक समय से लेकर गरीबी, बेबसी देखी भोगी। इस बेबस दौर की परिस्थिति ने मुझे अपने समाज, आसपास के लोगों, माता पिता, गांव के लिए कुछ करने प्रेरित किया। और 1984 में निकल पड़ा राजधानी भोपाल, करने लग गया सिविल सेवा की तैयारी। तभी से मैं मेरे प्रदेश की विकास यात्रा से निरंतर अपडेट होता रहा। 
 1990 के दशक में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों को पढ़ाया जाता था। मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक भागीरथी मुख्यमंत्री की जरुरत है। जब तक मध्य प्रदेश को भागीरथी तप और मानव मात्र की कल्याण की भावना वाला व्यक्ति नहीं मिलता तब तक प्रदेश के विकास की गति तेज नहीं हो सकती। 1990 - 1992 में ढाई वर्ष के लिए सुंदरलाल पटवा जी की सरकार बनी लेकिन विडंबना के कारण यह सरकार गिर गई। केरियर बनाने की उच्च शिक्षित युवा दहलीज ने 1993 से 2003 का स्थिर, दुरुह, विकास का संक्रमण, ठहराव देखा और भोगा है।
अंततः 2003 आशा की प्रभात उदय किरण लेकर आया। प्रदेश में भाजपा की सरकार आई। उमा श्री भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। पंडित दीन दाल उपाध्याय जी का अंतोदय सरकार के कार्यों के केंद्र में आया। अंतिम बेसहारा व्यक्ति का उत्थान शुरू हुआ। मानव सेवा सरकार का मिशन बना। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश की लंबे समय से चली आ रही आशा पूरी हुई। अपने लंबे शासनकाल में भागीरथी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने तप, मेहनत, समन्वय और दूरदर्शी कार्यों के बल पर प्रदेश को आज बीमारु राज्य की श्रेणी से बाहर निकाल लिया हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, मानव संसाधन, तकनीक, वित्त, बैंक, कृषि, सिंचाई, गुडगवर्नेंस, डिजिटल तकनीक, कानून और व्यवस्था सहित लगभग हर क्षेत्र में मेरा मध्य प्रदेश देश के सभी राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए आगे निकलने के प्रयास में कदमताल कर रहा है। आज मेरा मध्य प्रदेश गौरव गान गा रहा है। प्रदेश का हर नागरिक उत्साह, उमंग, स्वाभिमान के साथ गर्व महसूस कर रहा है। स्फूर्ति के साथ आगे बढ़ रहा हैं। प्रदेश और शेत्र के सभी भाई - बहनों को मध्य प्रदेश की स्थापना दिवस 1नंबर की बहुत-बहुत हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं......!
 मेरा मध्य प्रदेश महान
 वंदे मातरम
भारत माता की जय

Thursday, 21 October 2021

मध्यप्रदेश में साकार होता ...... " सत्यम - शिवम - सुंदरम " मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2021

भारतीय संस्कृति हमें अमर संदेश देती हैं। सत्य ही शिव है,  शिव ही लोक कल्याणकारी हैं, लोक कल्याण ही सुंदर है और जो सुंदर है वही सत्य है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस भावना के कारण आज मध्यप्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल 2003 के बाद प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में 526% से अधिक की वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय ₹15442 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति से बढ़कर ₹ 79909 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति से अधिक हो गई है।  जो आप हमें बताता है कि मध्य प्रदेश एक बीमारू राज्य के श्राप से बाहर निकल कर देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में तेजी से अपने मजबूत कदम के साथ आगे बढ़ रहा है। आज मध्य प्रदेश का आम बजट दो लाख करोड़ रुपए प्रति वर्ष से अधिक हो गया है।  
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय विचारों को साकार करते हुए गरीबों के खाने के लिए एक रुपए प्रति किलो अनाज देते हुए उनके लिए प्रधानमंत्री आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए गरीब को रोटी की चिंता से बाहर निकाल लिया गया है और आवास देकर आत्मसम्मान गर्व की जिंदगी दी जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के सपने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को आगे बढ़ाकर आज लगभग सभी गांवों को पक्की सड़क से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील उत्साही और आसावान बना दिया गया है। प्रधानमंत्री उज्वाला योजना ग्रहणी माता बहनों को गैस चूल्हा मुफ्त में देकर रसोई बनाने के काम को आसान कर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है।  
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने फसलों के उत्पादन को अनिश्चितता से बचाते हुए सरकार किसानों को वित्तीय सुरक्षा दे रही है। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ राज्य स्तरीय सीसी सड़क मार्गों का निर्माण तीव्र गति से हो रहा है बन रही सड़क मार्गों की निर्माण गुणवत्ता उच्च स्तर की है जो हमें अपनी आंखों से देखने को मिल रही है। तकनीकी, चिकित्सा, प्रबंधन और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उच्च स्तर के प्रशिक्षित मानव संसाधन को बनाया जा रहा है। प्रदेश में डिजिटाइजेशन को निरंतर नया आयाम दिया जा रहा हैं। अब छात्र छात्राओं के लिए कोई भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए पैसे की कमी नहीं है उन्हें छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण के माध्यम से धन की उपलब्धता आसानी से हो रही है। मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना ने तो छात्रों के सपनों को पंख ही लगा दिए हैं।
 प्रदेश की आर्थिक धार्मिक धमनियों में बहने वाली बिजली का उत्पादन 2003 में केवल 2900 मेगावाट था जिसे अब शिवराज सरकार ने 18384  मेगावाट  से आगे पहुंचा दिया है और आज प्रदेश के गांव में 24 घंटे घरेलू बिजली मिल रही है और किसानों को सिंचाई के लिए 10 घंटे प्रतिदिन बिजली मिल रही है। बिजली उत्पादन में हुई इस वृद्धि से उद्योगों ने भी राहत की सांस ली ली है और निरंतर तरक्की की जा रही है।
 अपने शासनकाल के 10 वर्षों में कांग्रेस सरकार ने 2003 तक प्रदेश में कृषि की विकास दर को 3% से ऊपर नहीं ले जा पाई। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने अपने परिश्रम से मध्य प्रदेश की कृषि विकास दर को 18. 89% से ऊपर पहुंचा दिया है। कृषि निवेश, विपणन, भंडारण और परिवहन की विकसित व्यवस्था ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को एक नया प्रतिस्पर्धी आयाम दिया है। इसका श्रेय किसान पुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जाता है। 0% से नीचे ऋणत्मक ब्याज दर पर खेती के लिए ऋण दिया जा रहा है और समय पर खाद, बीज और कीटनाशक की व्यवस्था करते हुए नई कृषि तकनीक को तेज गति से अपनाया जा रहा है। जिससे पिछले डेढ़ दशक में राज्य में गेहूं के उत्पादन में उत्पादन में 345% से अधिक वृद्धि कर दी हैं। जलाशयों के निर्माण को मिली गति ने प्रदेश में नहरों से सिंचाई के क्षेत्र को शिवराज सरकार ने पिछले 15 वर्षों में 7 से 40 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा दिया है। कृषि फसलों के उत्पादन से किसानों के पास वित्तीय पूंजी निर्माण के साथ-साथ  आय निश्चित होने से किसानों में खेती के प्रति उत्साह का संचार हुआ है। शिवराज सिंह सरकार ने कृषि के लिए बनाए अनुकूल सुविधाओं माहौल ने आज मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादन को 2.14 से सीधे 5.44 करोड़ मीट्रिक टन से आगे ले जा लिया है।
 शिवराज सिंह सरकार ने अपने अथक प्रयासों से मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर को 379 से 221 प्रतिवर्ष पर लाकर मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर को 86 से 47 प्रतिवर्ष पर ले आया है और प्रदेश में 22% से बढ़कर अब  86% से अधिक लोग संस्थागत प्रसव कराने लगे हैं। प्रदेश में अब दो की जगह 36 लाख से अधिक बेसहारा लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलने लगी है। यह लोग अब आत्मसम्मान का जीवन जी रहे हैं। 
गरीबों की सुरक्षा और उनके उत्थान के लिए बनाई गई मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन कल्याण " संबल योजना "  ने तो शिवराज सरकार को मध्य प्रदेश की जनता के लिए पालक गार्जियन बना दिया है और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने पालक सरकार " गार्जियन गवर्नमेंट " का आकार ले लिया है । हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अन्य सैकड़ों योजनाएं हैं जिसने लोक कल्याण को राजधर्म के केंद्र में ला दिया है और अब विकास प्रमुख है। लगता है मध्य प्रदेश में हो रहे एक लोकसभा और 3 विधानसभा के इन चुनावों में जनता लोक कल्याण के लिए सत्यम शिवम सुंदरम को ध्यान में रखते हुए अपना बहुमूल्य मत भाजपा को देकर विजय ध्वज भारतीय जनता पार्टी के हाथों में देगी और देना भी चाहिए। सत्य मेव जयते ... अंततः जन गण मन अधिनायक जय हे ..... !
DINESH SAHU
राष्ट्रीय संयोजक
All India movement for democratic reforms
यह लेखक के अपने व्यक्तिगत विचार हैं

Monday, 18 October 2021

भारतीय जनता पार्टी बेहतर विकल्प - मध्य प्रदेश उपचुनाव 2021

             आज के समय में लोकतंत्र ने विकास प्रशासन का स्वरूप ले लिया है। अच्छे से अच्छा शासन कहलाने के लिए लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा दिनों - दिन बढ़ती जा रही हैं। सभी राजनीतिक दल जनता को अधिक से अधिक सुविधाएं देकर सत्ता में आना चाहते हैं और जनता भी अधिक से अधिक सुख शांति और समृद्धि चाहती हैं जनता छोटे से छोटे कार्य के लिए लोक कल्याणकारी राज्य की ओर देख रही हैं। विकसित देशों की तरह अब जनता का एक केंद्र बिंदु बन गया है - विकास। राजनीतिक दलों और जनता दोनों की निजी हित की विवशता के कारण लोक कल्याण केंद्र में आ गया हैं। मतदाताओं को बहलाने लोभ देने और भ्रम के सहारे उनका उपयोग राजनीतिक दलों के लिए अब गौण बन गया है। अधिकांश जगह केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर अभी भाजपा की सरकार है। मोदी-01 सरकार के बाद अब निरंतर मोदी-02 सरकार राष्ट्र के स्वाभिमान और गौरव को एक निष्पक्ष समान स्थाई दूरदर्शी आयाम देते हुए सेना विदेश स्वास्थ्य शिक्षा कृषि आधारभूत उद्योग और परिवहन के साथ-साथ अन्य सभी क्षेत्रों में विकास को एक सुदृढ़ विकसित स्वरूप दे रही है और अर्थव्यवस्था को निरंतर ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।
 हमारे मध्य प्रदेश के भागीरथी मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने कांग्रेस के समय बीमारू राज्य कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को जनता के लिए मध्य प्रदेश सरकार को गार्जियन पालक सरकार बना दिया है। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की लाडली लक्ष्मी कन्यादान संबल योजना जैसी लोक कल्याणकारी सैकड़ों योजनाओं के साथ कृषि निवेश शिक्षा स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की मामले में प्रदेश की जनता जनार्दन को चिंता मुक्त कर दिया है और जनजीवन के अन्य सभी आर्थिक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को नई ऊंचाइयों पर लेकर गए हैं और ले जा रहे हैं। अपने भागीरथी ईमानदार प्रयासों के कारण ही आज शिवराज सिंह चौहान जी मध्य प्रदेश के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री बनकर उभरे हैं। 
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह दोनों के केंद्रबिंदु में दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद का अंत्योदय विकास है। केंद्र और राज्यस्तरीय खाद्य वितरण व्यवस्था को मजबूत विकसित रूप देकर गरीब को भूखे रहने की आशंका से बाहर निकाल लिया गया है। भाजपा सरकारों की सभी लोक कल्याण की विकास योजनाओं की चर्चा करना यहां संभव नहीं है। 
बदलते राजनीतिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश में हो रहे इन लोकसभा और विधानसभा के इन उपचुनाव में कांग्रेस या अन्य किसी विपक्ष के भ्रम में नहीं आ कर जनता को अपना हित ध्यान में रखते हुए अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के विकास के लिए शासन में सत्ता में बैठे राजनीतिक दल भाजपा को अपना बहुमूल्य वोट देकर विजय बनाना चाहिए और अपने विकास को सुनिश्चित करना चाहिए। मध्य प्रदेश में हो रहे लोकसभा और विधानसभा के इन उपचुनाव में जनता के पास भारतीय जनता पार्टी एक बेहतर विकल्प है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे तो परिणाम जन हितेषी निकलेंगे और इसी में लोक कल्याण निहित है 
                                         दिनेश साहू 
                                    राष्ट्रीय संयोजक
   All India Movement For Democratic Reforms
                    यह लेखक के अपने व्यक्तिगत विचार हैं

Saturday, 26 December 2015

मंगलमय हो 2016 का ब्रह्म मुहूर्त

संवेदनशील जीवन को ढूंढता जन जीवन

उम्मीदों के जश्न में ही बेहतर भविष्य की आशा


नये साल पर हार्दिक शुभ कामनाएं



दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत सबसे हटके विलक्षण और संवेदनशील है। सबसे पुराने इस प्रजातंत्र की स्वीकार्यता स्वाभाविक और सुदृड़ है। इसके ऊपर किसी प्रकार का भी संदेह करना, स्वीकार करना या सोचना भी गलत है। ऐसी ही अनेकों दुर्लभ विशेषताएं हैं जिसे गिनाना यहां कठिन हैं। जो दुनिया में भारत को विशिष्ट स्थान दिलाती हैं। अपनी इन्हीं चिरकालिक अलग पहचानों के बल पर अब भारत फिर से एक बार विश्व गुरू बनने की सोच रहा है। आप सोच रहे होंगे नये साल की शुरूआत राजनीतिक चिंतन के साथ ही क्यों ? तो यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार प्रसांगिक लगते हैं। गांधी जी की सोच सटीक थी। उनका कहना था। उन्हें राजनीति करने का कोई शौक नहीं। लेकिन वे राजनीति में फिर भी इसलिय सक्रिय है, क्योंकि राजनीति रूपी विषेला नाग समाज के ऊपर इस तरह पिंडली मारकर बैठ गया कि समाज के लिए उससे मुक्ति पाना नामुमकिन है।  इस विषैले साप का थोड़ा भी जहर मैं कम कर संकू तो मेरा सौभाग्य होगा। बस इसी सींख को ध्यान में रख नये साल के ऊषाकाल में राजनीति की दशा और दिशा पर अपनी सोच लोगों के सामने रखना कोई गलत बात नहीं ! राजनीति ईश्वरीय व्यवस्था के बाद इस दुनियां का सबसे बड़ा विनियामकीय क्षेत्र है। इसके भीतर समाज के सभी क्षेत्र समाहित हैं।

शुरू हो रहे नये साल 2016 के ऊषाकाल में राजनीति तेज गति से करवट ले रही है। प्रकृति में हो रहे परिवर्तनों के समान ही संवेदनशील राजनीति भी धीरे – धीरे गायब होती नजर आ रही है। अब राज “ नैतिक ”  न रहकर “ नीतिक ” होता जा रहा है। पहले कांग्रेस ने 65 सालों तक भ्रम में उलझाते हुएं देश को मूल्य विहीन बनाने में कोई कोर – कसर नहीं छोड़ी। अपना राजनीतिक हित साधती रहीं। 65 सालों तक देश एक दलीय वंशानुगत राजनीति का दंश झेलता रहा। दुनिया का ये सबसे विशाल लोकतंत्र अपनी एक ही टांग पर कराहता रहा। भारत को एक शक्तिशाली विपक्ष तक नहीं दे पाया। ऐसे में भारतीय जनसंख ने राजनीति के घोर अंधेरे में दीपक की लौ जलाई। लोग उसकी ओर आशा भरी नजरों से देखने लगें। स्वयं सेवकों ने ठंडे पानी में फूले हुए चने बिना नमक मिर्ची के खाकर श्रम किया।  लोग उनके साथ होते गयें। विरोधियों की यातनाएं सहीं। आलोचनाएं झेली। लेकिन एक ही मंत्र “ चरैवेति – चरैवेति ”।  कारवां बढ़ता गया। मेहनत रंग लायी। आज लगभग 39 अनुषांगिक संगठनों का संघपरिवार हैं। अब देश में उसके विचारों का राज भी है। भारत के प्रजातंत्र के पास सशक्त पक्ष – विपक्ष। विश्व का एक परिपक्व और पूर्ण लोकतंत्र। यहां संख्या बल के आधार पर पक्ष – विपक्ष को  शक्तिशाली न मानें। बल्कि नये – पुराने दल को भी याद रखें। कभी बीजेपी कांग्रेस की तरह ही नहीं उनसे भी बुरी स्थिति में थी।
पहले अटल बिहारी वाजपेयी 6 सालों तक गठबंधन के बल पर भारतीय प्रजातंत्र को राजनीति के संक्रमणकाल से बाहर निकालने में सफल रहे। उन्होंने एक वोट की भी किसी प्रकार की गलत व्यवस्था नहीं की। एक वोट के अभाव में भी अटल जी ने अपनी सरकार गिरने दी। इतना लंबा राजनीतिक संघर्ष झेलने के बाद भी अपने पास राजनीतिक लिप्सा को फटकने तक नहीं दिया। नैतिक राजनीति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। तब राज “ नैतिक ” बनने की आशा बलवती होने लगी। राज की नीति पीछे छुटती नजर आने लगीं। इसके बाद 2014 में लोकसभा के आम चुनावों में जनता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को करारा जवाब दिया। एनडीए गठबंधन के साथ लड़ने के बावजूद पहली बार बीजेपी को अकेले पूर्ण बहुमत दिया। लोकसभा के इन चुनावों में उत्तरप्रदेश की जनता ने 85 सीटों में से 72 सीटें बीजेपी को देकर अपनी आशा को और अधिक स्पष्ट कर सर्वोपरि बना दिया। जहां वर्षों से विखंडित बहुमत आ रहा था। जिसके एकमत होने की किसी ने आशा तक नहीं की थी। संवेदनशील राजनीति पर फिर एक बार देश की आशा बलवती होने लगी। देश उत्साह, उमंग और स्फूर्ति महसूस करने लगा।

आज बीजेपी के शासन को लगभग पौन दो साल होने को आयें। मगर देश की जनता नये साल को मनाने के शुभ अवसर पर किसी ठोस परिणाम की बाट जोह रही हैं। पहले उसने दिल्ली विधान सभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को अप्रत्याशित भारी बहुमत देकर बीजेपी की झोली में 70 में से केवल तीन सीट डालकर संकेत दिया। यहां तक कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी की जमानत तक जब्त करवा दी। इतने बड़े भरे – पूरे परिवार का कुनबा धरा का धरा रह गया। क्योंकि नैतिक मूल्यों की लौ आम आदमी पार्टी लेकर चल रह थी। जो कभी भारतीय जनता पार्टी की पूर्वज भारतीय जनसंघ लेकर चला करती थी। बीजेपी की इस हार के पीछे शायद सबसे बड़ा कारण टिकट वितरण में पार्टी के दीर्घकालीक स्थापित परम्पराओं की उपेक्षा रही हों। फिर बीजेपी के सामने बिहार में आया अपने धुर विरोधियों नीतिश और लालू का बेमेल जोड़। बिहार के विधान सभा चुनाव 2015 में तो बीजेपी अपनी पुरानी जमीन भी बचा पाने कामयाब नहीं हुई। पिछली बार से भी कम सीटों पर उसे संतोष करना पड़ा। इन विधान सभा चुनावों में बिहार की दम तोड़ती क्षेत्रीय राजनीति यहां नहीं जीती। बल्कि संवेदनशील राजनीति का झंडा लेकर यहां पहुंची बीजेपी के लड़खड़ाते कदमों को संभालने के लिए एक बार फिर जनता ने बीजेपी के कान जोर से फूंके। ताकि समय रहते इसे गुरू मंत्र समझ जागे। व्यक्ति निष्ठ बनने के प्रयास न करें। पार्टी निष्ठ ही बने रहे। उपलब्धि और कठिन समय दोनों सामूहिक हो। यशोगान में संगठन की भावना प्रतिध्वनित हो।


बिहार – दिल्ली विधान सभा चुनावों में जो हुआ वो हो भी क्यों न ?  प्रजातंत्र में सशक्त विपक्ष ही तो नियंत्रण का सर्वोच्च साधन होता है। वही तो है जो अपनी रचनात्मक भूमिका से शासन – प्रशासन को स्वच्छ बनाये रखने के साथ उसे सतर्क रख, गलत के प्रति आवाज उठाकर उसमें डर बनाये रखने का काम करता है। बीजेपी को देश की बागडौर सौंपकर अपनी नैतिक मूल्यों की धरोहर को आगे बढ़ाने का पूरा मौका तो देश की जनता ने उसे दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर जनता तो उसके साथ हैं। मगर एक परिपक्व लोकतंत्र राज्यों में भी पूरी तरह बीजेपी को एक छत्र पताका सौंपकर कैसे निरंकुता की ओर बढ़ा सकता हैं ?  खिलखिलाते प्रजातंत्र में ये मतदाताओं की परिपक्वता नहीं तो क्या ?  इससे हमारे राजनीतिक दलों को देश में परिपक्व हो रही मतदाताओं की मानसिक आयु के प्रति आगाह हो जाना चाहिए !  लोकतंत्र परिणामनोम्खी मामले पर संवेदनशील होता है। वोटर उसे सत्ताहीन कर सकता है। चुनाव प्रोपेगण्डा के दौरान होने वाली लोक लुभावन बातें भविष्य नहीं संवार सकती। जनता को धरातल पर मूर्त रूप से महसूस होना चाहिए। देश के प्रत्येक व्यक्ति के खातें में आने वाले 15 लाख रूपयों की चर्चाएं भी अब ओझल होती जा रही हैं। महंगाई से आम आदमी की थरथराहट बढ़ती जा रही हैं। विदेश यात्राएं रोजमर्रा की बात हो जाने के कारण ये लोगों के ध्यान से हटाती जा रही हैं। इन पौने दो सालों में न कोई धरातल पर ठोस निवेश आया, और न ही रोजगार के अवसरों में कोई चमत्कारिक बढ़ोत्तरी हुईं। बस विश्व लेवल पर हमारे उत्साहवर्धक चुनाव परिणामों की एवज में हमारे प्रजातंत्र की झोली में सम्मान और वाहवाही आयें। ठोस आवक नहीं हुईं। पड़ोसी मुल्क से तक चुनावी दौरान हुई चर्चा अनुरूप न कोई संबंध सुधरें और न ही कोई ठोस प्रतिकार नजर आया। पूरी दुनिया में गोपनीय रखते हुए अटल जी द्वारा परमाणु विष्फोट के काम को अंजाम देने से बुद्ध मुस्कराया तो समझ में आता है। लेकिन मोदी जी द्वारा अपनों को विश्वास में लिए बिना अचानक पाकिस्तान जाने से तो लगता है नवाज जरूर मुस्कराया।

आर्थिक सुधार सर्वहारा वर्ग के लिए नींचे से शुरू करने से उन्हें महसूस होतें। ऊपर से होने वाले सुधार तो उन्हें केवल ढांढस ही बंधा पा रहे हैं। सपने जैसा ही लग रहे हैं। लगता है धैर्य की परीक्षा हो रही है। ऊपर से सुधार नींचे वालों के साथ होते तो स्थायीत्व आता। महसूस होत। विकास होता। हम सबका। राज करने वालों और जनता दोंनों का। विधायी कार्यों में भी कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। न्यायिक नियुक्ति आयोग पर कानून बना तो उसे भी न्यायपालिका ने रद्द घोषित कर दिया। राज्य सभा में बहुमत न होने के बहाने से जनता को कोई लेनादेना नहीं। उसे ठोस आकार चाहिएं। जिसमें वो अपने आप को बेहतर तरीके से ढाल सकें। पुराने ही कानूनों की ही कमियों को टटोलने या उनमें सुधार के लिए सुधार के प्रयास करने से काम नहीं चलने वाला । हमें समन्वय की राजनीतिक संस्कृति से परिणाम लाने होंगे। हमें अटल – अडवाणी जी की गंभीर संस्कृति को अपनाना होगा। अहं या अतिशय अनुशासन को नहीं आने देना होगा। कांग्रेस तो लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, भारतीय भू-सुधार अधिनियम, भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, रोजगार गारंटी अधिनियम, सूंचना का अधिकार अधिनियम, शिक्षा का मूल अधिकार अधिनियम जैसे समय और लोकोपयोगी अधिनिय बनाकर अलग हो गई। प्रारंभिक दौर के चलते सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं कर पायी। प्रभावी दायित्व अब बीजेपी के ऊपर हैं। वो अच्छे पुराने कानूनों को प्रभावी तौर पर क्रियान्वित कर सकती हैं या इनसे अच्छे समयोंपयोगी कानून बनाकर लागू कर सकती हैं। बीजेपी को समय मिला है। राजनीति में अछूतवाद जैसी कोई चीज नहीं होती वो भी लोकोपयोगी कानूनों के प्रति। कांग्रेस ने जरूर अछूतवाद किया। बीजेपी तो राजनीतिक अछूदवाद के विरूद्ध लड़ने वाली पार्टी हैं। उसने राजनीतिक अछूतवाद के विरूद्ध लंबा संघर्ष किया है। जम्मू एण्ड काश्मीर में पीडीपी जैसी अलगावादी पार्टी के साथ राज्य में सरकार बनाने के पीछे छिपे तर्क भी समझ से परे लगते हैं। वो भी एक वोट के लिए केन्द्र की सरकार गिरा देने वाली सत्यनिष्ठ पार्टी बीजेपी के लिए ऐसे बेमेल गठबंधन।
ऊपर से जम्मू एण्ड काश्मीर में होती बीजेपी की राजनीतिक किरकिरी। उसके स्थापित सिद्धांतों से ही परे लगती है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोकपाल एवं लोकआयुक्त अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर लोकपाल की नियुक्ति के लिए तो अब आम जनता को चर्चाएं तक सुनाई नहीं देती। नियुक्ति नसीब होना तो दूर। जबकि लोकपाल अधिनियम में लोकपाल की नियुक्ति के लिए तय एक साल की समय से काफी अधिक समय हो चुका है। मेरे राज्य में व्यापम काला सच जस का तस है। दूध और पानी कब  अलग होंगे पता नहीं। जबकि मध्यप्रदेश में बीजेपी लगातार 15 वर्षों तक शासन करने का रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। कार्यकर्ता राजनीतिक विलगाव के चलते अवसाद में चला जा रहा हैं। आंतरिक प्रजातंत्र के नाम पर कड़े अनुशासन के सहारे व्यक्तिनिष्ठ पहल सामने आ रही है। राजनीति संवेदनशील होने की बजाय अपनी नैतिक राह से भटक रही है।
आम जन जीवन पर हमारा सोचना लाजमि है। अब इससे आगे नये साल पर लिखने की कलम इजाजत नहीं देती। हां, नवंबर - 2015 में पेरिस में हुए अंतर्राष्ट्रीय ग्रीन सम्मेलन में ग्लोबल वार्मिंग पर उठें ज्वलंत सवालों के चलते हम इस नये साल के अवसर पर हर व्यक्ति एक पौधा रोपकर अस्तित्व के संकट में पड़ते मानव जीवन को ये सर्वोतम् उपहार देकर नये साल के जश्न को झूमकर मना सकतें हैं। एक बेहतर भविष्य की आशा कर सकतें हैं। यहीं शुरू हो रहे नये साल 2016 को सर्वोत्म उपहार होगा। साथ ही हमारा सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी पूरा होगा।
                                       
  (इदम् राष्ट्राय स्वा:, इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम्)


Tuesday, 11 August 2015

वैचारिक द्वंद के घने कोहरे में हम सबका राष्ट्र ध्वज को सैल्यूट

15 अगस्त 2015 पर विशेष


1.   जन-गण-मन ..... की एक स्वर में प्रतिध्वनि हमारी मूल पहचान 

2.   एक निष्पक्ष – चिंता या चिंतन 

3.   हमेशा ऊंचा लहराता रहे हमारा अमर तिरंगा 

4.   देश की आन-बान-शान में जा देने को हम तैयार

5.   गहरी होती कौंध से भरती जनता की आंखें 

6.   नजरों से ओझल होता निकट भविष्य

7.   उथल – पुथल के इस युग में घबरातें लोग

8.   अपने आने वाले दिनों की तस्वीर को साफ देखने लालायित देशवासी 

9.   इन हिलोरों के बाद कंचन बनकर उभरेगा देश 

10.                   दुनिया की अंगुवाई करने हम तैयार

  
 हर साल की तरह फिर आज हम स्वतंत्रता दिवस की बेला में खड़े हैं। खुशी के साथ चिंतन और मनन को लेकर आने वाले इस राष्ट्रीय पर्व को हम मनाने जा रहे हैं। 15 अगस्त की सुबह उत्साह और उमंग की ऊर्जा के साथ एक बार फिर हम सब भारत के लोगों का एक स्वर में राष्ट्र ध्वज को सैल्यूट .......... !  हर संकट की घड़ी में हम सभी एक, देश हर दम एक साथ खड़ा – यहीं हम सबकी विशेषता। अच्छे विचारों को सामने लाने के लिए आंतरिक तौर पर वैचारिक मत भिन्नता जरूरी …… !  इन सबके बावजूज सबसे पहले दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए जवानों के साथ हम सब हर पल तैयार .... सजग ....... सतर्क ...... संवेदनशील ....... ।
स्वतंत्रता दिवस याने हमारे उन पूर्वजों के संघर्षों की यादों को संजोने ...... याद करने ..... उनके बतायें रास्ते पर चलने के लिए प्रेरणा लेने का दिन ...... जिन्होंने 180 वर्षों के अपने अथक संघर्षों से हमें ये स्वतंत्रा दिलाई। उन घोर अमानवीय यातनाओं के याद करने का दिन जो हमनें गुलामी के दौर में झेली हैं। ये यादें ही हमें बताती हैं हमें गुलामी का महत्व। ये यादे ही हमें प्रेरित करती हैं मातृ भूमि पर अपने प्राण न्यौछावर करने ...... संघर्ष करने ..... सतर्क रहने ...... दुश्मन को करारा जवाब देने पुरजोर जज्बा देने के लिए। 
आज हम 69 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्त किए 68 साल बित गएं। इस लंबे अर्से में भारत ने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में अनेक ऊंचाईयों को छुआ हैं। भारत की मानसिक आयु ने भी अपना एक ऊंचा मुकाम हांसिल कर लिया हैं। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत का ये सिंहासन लगातर ऊंचा होता जा रहा है। अब हमारे बुजुर्गों ही नहीं, हमारे युवा और उनके पीछे आती किशोरों की पीढ़ी भी हमारी वैचारिक विरासत को अधिक याद करने की बजाय वो वर्तमान और भविष्य पर अधिक चिंतन करना चाहती हैं। पृष्ठ भूमि वाले आधारभूत विषय आज देश के हर तबके के नागरिक के दिल-दिमाग में लगभग स्पष्ट हैं। आज व्यक्ति मेजर की जगह तात्कालीक तौर पर उभरते और उसके हित वाले माइनर विषयों पर अधिक सोचने लगा हैं।
परिपक्वता की दहलीज पर पहुंच चुकी देश के मतदाताओं की मानसिक आयु व्यवस्था को ट्रैक पर लाने के लिए लगातार आगे बढ़ रही हैं। जनता ने ही 2014 में लोकसभा के आम चुनावों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत देकर प्रजातंत्र को पूरा किया। जनता जनार्दन ही हैं जिसने स्वतंत्रता के बाद पहली बार विपक्षी दल बीजेपी को अकेले आशा अधिक बहुमत देकर देश को एक दलीय और वंशानुगत शासन व्यवस्था के श्राप से मुक्त किया है। 1990 के दशक से जो राजनीति में उथल-पुथल (In a Time of Tarbulance) का दौर शुरू हुआ। उसकी मजबूरी वश देश गठबंधन राजनीति की खाई में जा गिरा। विश्व की दौड़ में शामिल होने के लिए इसी समय कांग्रेस के करकमलों से पूर्व प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिंहराव की अगुवाई में देश में शुरू हुआ आर्थिक ग्लोबलाइजेशन। जो कभी पटरी से उतरता तो कभी कभी ट्रैक से पर दौड़ता नजर आया। तभी से आज भी आर्थिक ग्लोबलाइजेशन भारत में अविरल रूप से लगातार ऊंचाईयों की ओर बढ़ रहा हैं। 

ऐसे विपरित समय में पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक सफल खेवनहार की तरह देश को गठबंधन की सफल राजनीति का पाठ पढ़ाकर देश को विपत्ती के महासागर से बाहर निकाल लिया। अटल जी के बाद फिर देश ने गठबंधन सरकार के दो मौन कार्यकाल देंखें। पूरे 10 वर्षों तक उस पर वंशवाद का साया छाया रहा। फिर भी वो देश के लिए अतुलनीय रूप से सफल रहा। उसने भले ही रेल तेज नहीं दौड़ायी लेकिन हमारी गाड़ी को ट्रैक से उतने नहीं दिया। परिवर्तन के प्रारंभिक दौर में स्वभावत: अपने हित साधने वालों ने जरूर सेंध लगाई जिससे बदनामी भी ज्यादा सामने उभरकर सामने आयी। इस दौरान विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र ने वंश विशेष के साथ स्वतंत्र शासक के अदभूत समन्वय को देखा। भले ही मौन के बल पर समय आगे बढ़ा हो। तथाकथित रूप से लगभग ही सही, मगर देश का वो विपरीत समय भी दुनियां की मैराथन में शामिल रहते हुए, आगे निकलने के पुरजोर प्रयास के साथ, मौन देश के शासन को इस विपत्ती के समय से बाहर निकाल ले आया।

अब 2014 के आम चुनावों में जनता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी को रिकॉर्ड बहुमत देते हुए उस पर गुरूत्तर दायित्व डालकर भरोसा जताया हैं। जिन वादों को लेकर वर्तमान सरकार अस्तित्व में आयी थी, उन्हें कारगर करने प्रतिध्वनि तो बहुत ऊंची सुनाई दे रही हैं। यदि ये मधुर ध्वनि धरातल पर आयी तो हम दुनिया की अगुवाई करते नजर आयेंगे। विश्व गुरू रहे भारत का सपना एक बार फिर होगा। आज संसार के सभी लोगों की नजरें भारत के ऊपर हैं। प्लीज कम एण्ड मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, विदेशों में जमा काले धन की पाई-पाई घर आने की आशा, प्रभावशाली बनने के लिए आगे बढ़ती हमारी विदेश नीति, सरकारी कोष में जमा होने वाले धन का बढ़ता ग्राफ और दहाड़ से घबरा रही महंगाई वाले हमारे साहसी बोल हमारे सुनहरे भविष्य की राह खोल रहे हैं, कहे या खोल सकते हैं। अभी कहना मुमकिन नहीं। इन्हें भविष्य पर छोड़ने के अलावा अभी कोई रास्ता नहीं। आम लोगों के लिए देश में महंगाई घबराने की बजाय टस से मस न होकर अपने कदम आगे ही बढ़ा रही हैं। 
भ्रष्टाचार ने तो लगता है व्यवस्था में सारे मूल्यों को ही निगल लिया हैं। घुस लेने वाले से ज्यादा देने वाला खुश हो रहा हैं। लेने वाला तो घबराता भी है लेकिन देने वाला केवल अपना हित चाहता है। उसे चाहिये कम खर्चें में बिना लंबी प्रक्रिया में पड़े शीघ्र काम। देने वाले की इस दोहरी मनोवृत्ती पर लगाम लगे बिना सरकार के लिए भ्रष्टाचार पर विजय हांसिल करना दुष्कर ही नहीं मगर कठिन अवश्य है। एक ओर व्यक्ति गलत कामों के सहारे ही सहीं, मगर हर हाल में आगे बढ़ना चाहता हैं। दूसरी ओर वो भ्रष्टाचार के लिए सरकार को कोसता हैं। लगता है ये व्याधि तब तक दूर नहीं हो सकती जब तक समाज के हर लोगों में व्यक्तिगत तौर पर नैतिक संवेदनाएं नहीं जागती हैं। हमें एक जुट होकर हर जगह बुराई का विरोध करना चाहिये। आवाज उठाना चाहिए। चाहे बुराई किसी भी रूप में हो। दिल्ली की आप सरकार सार्वजनिक स्थलों पर हो रही बुराई के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने की पहल के लिए  आह्वान कर रही है। जिसे पूरे देश में आगे बढ़ना चाहिए। आज दिवस देखना चाहता है सभी एक दूसरे की अच्छी पहल का स्वागत करें, देश में समनव्य की संस्कृति हो।
इसमें दो राय नहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहले रोजगार की गारंटी को कानून में बदलकर देश को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी एक्ट दिया। इसके बाद देश को सूंचना अधिकार अधिनियम आरटीआई देकर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने वाला साहसी कदम उठाया। इसी क्रम में देश के बच्चों के लिए शिक्षा के मूल अधिकार को कठोरता से क्रियान्वित करने शिक्षा का अधिकार अधिनयम लाकर अमह कदम उठाया। अपनी स्थिति को भापकर आखिर में जाते-जाते ही सही कांग्रेस देश को भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनिय और भारतीय लोकपाल अधिनियम दें गईं। कांग्रेस लोक कल्याण के साथ-साथ हमारे प्रजातंत्र के लिए मील का पत्थर साबित होने वाले इन कदमों का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाली सरकार पर छोड़ गई। देश की जनता अब बीजेपी से इन अहम विषयों को जमीन पर लाने के साथ-साथ कांग्रेस द्वारा उठाए गये इन कदमों से भी बेहतर कानूनी प्रबंध की आशा कर रही हैं। आज नवीन सरकार को बने एक साल से अधिक का समय गुजर गया, अभी देश केवल गूंज सुन रहा है। एक ओर देश अपने आपको आत्मविश्वास से लबरेज महसूस कर रहा है, तो दूसरी ओर देश के लोग उठाये गयें कदमों की आहट सुनने के सुनने के साथ-साथ, उसे महसूस करने के लिए बेसब्री से लालायित हैं। लोकपाल बनाने के लिए अधिनियमित की गई एक साल की समय सीमा के चले जाने के बाद भी देश को लोकपाल की नियुक्ति के लिए आवाज तक सुनाई नहीं आ रही है।
 आज उसी अण्णा हजारे को जिसे बीते एक समय आज का गांधी पुकारा जाने लगा था, उनकी लंबी-लंबी चिठ्ठियों के जवाब एक लाइन में मिल रहे हैं। सचमुच उस समय गांधी के बाद कोई तो मुखौटा आया जिसके साथ पूरा देश एक स्वर में खड़ा था। उनके एक आह्वान पर थोड़ी देर के लिए शाम के समय सारे देश में एक साथ अंधेरा छा गया और मोमबत्तीयां जल उठी। बिना भेद-भाव, ईर्ष्या-द्वैष, स्वैच्छा से हर तबकें, न कोई गरीब, न कोई अमीर सभी के सामने एक ही निर्विवाद आवाज। जनता सड़कों पर उमड़ पड़ी। देश में पिन ड्राप साइलेंस। सभी कर्ताधर्ता सन्न। क्या आरएसएस, बीजेपी, कांग्रेस, समाजवादी, कम्यूनिष्ट या अन्य क्षेत्रीय दल हम सब उनके साथ। विडंबना ये धरोहर हम संजो नहीं पायें। आगे नहीं बढ़ा पायें। महत्वाकांक्षाओं ने उसे तितर-बितर कर दिया। मानव शांति के अस्तित्व के लिए खतरा बना आतंकवाद लगातार हमें चिड़ाने के प्रयास कर रहा हैं। हमारी विदेश नीति की अधिकांश चर्चा पाकिस्तान के ही ईर्द-गिर्द घुम रही है। दूसरी ओर लंबे समय से आतंकवाद की पीड़ा झेल रहे जम्मू एण्ड कश्मीर की सरकार में पीडीपी और बीजेपी का बेमेल हमारे दिमाग के परे लगता है। पाक आतंकवादी हमारे निर्दोष लोगों की जान लेने के लिए हर कभी हमारे देश में चले आते हैं। उन्हें हम जिन्दा पकड़े या मुर्दा। पड़ोसी उसे अपने यहां के नागरिक होने से इंकार कर देता है। साक्ष्यों को तो वो धता दिखाता हैं।  
संसद हो या विधान सभाएं हमारी विधायिकाएं प्रासंगिक बहस की जगह संख्या बल की राजनीति अधिक करने लगी हैं। समय से पहले सत्रावसान होना। सदन को चलने से बाधित करना। विशेज्ञता के इस युग में तकनीकी पर आधारित बहस की जगह राजनीतिक विषयों की बहस पर ही सदन का समय गवा देना। राजनीति दलों में अतिशय अनुशासन की सीमा के चलते बड़े पैमाने पर डम्प पार्लियामेंट, डम्प विधान सभाओं के बढ़ते अस्तित्व जैसे अनेक विषयों ने आम लोगों को चिंता में डाल दिया हैं। सभी अपनी – अपनी बात उचित ठहराने में लगे हैं। जिन्होंने मूल्य आधारित जनजीवन की बहतरी के लिए विपक्ष में रहकर लंबे समय तक संघर्ष किया वो भी और जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद से आज तक सत्ता सुख भोगा वो भी। सभी एक ट्रैक पर। प्रजातंत्र के पूरा होने पर आज भी हम वो ही देख रहे हैं, जो विगत 65 सालों से देखते आ रहे हैं।
  
चारों ओर सुषमा-वसुंधरा-शिवराज के नाम का हो हल्ला। जनता को सच्चाई कुछ सूझ नहीं रहीं। क्या विवादों में आयी किसी धरोहर को बचाना इतना जरूरी हैं। या किसी को जांच की भट्टी में तपाकर उसे कंचन बनाकर निकालना। कहीं वहीं तो नहीं हो रहा जो 65 सालों से कांग्रेस करती आयी। वो भी तब जब बीजेपी जैसा मूल्य आधारित राजनीतिक दल सत्ता में हैं। जनसंघ के काल से मूल्य आधारित राजनीतिक दल की दुहाई दे रहें बीजेपी में उसी कांग्रेस के कार्यकर्ता धड़ल्ले से आ रहे हैं। जिसके मूल्यों के विरोध में हमने संघर्ष किया। लगता है अब इस अवसरवादी विपरित प्रवाह ने चुनावी जीत को सर्वोपरी बना दिया हैं। मूल्य बीतें दिनों की बात बनकर रह गएं। गलत काम करने वाला एक व्यक्ति ललित मोदी विदेश में बैठकर निडरता से एक से बढ़कर एक आरोप सभी दलों के हमारे कर्ताधर्ताओं पर लगा रहा हैं। हमारी व्यवस्था की कमियों को उजागर कर स्वच्छ बनाने की चाह रखने वाले हमारे व्हीसिल ब्लोअर अपनी जान की सुरक्षा गारंटी की कमी के चलते बड़े पैमाने पर एक्टिव होकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। सरकार के लिए व्हीसिल ब्लोअर की सुरक्षा और उनके द्वारा होने वाले संभावित दुरूपयोग के बीच संतुलन बिठाना कठिन हो रहा हैं। देश इस पर सरकार के किसी कड़े कदम उठाने की आशा कर रहा है।    

 कांग्रेस के आखिर समय में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कालेधन की जांच के लिए एसआईटी बनाने के निर्देश के क्रियान्वयन के अलावा कालेधन पर कोई सीधा फायदा आम जनता को पहुंचता नजर नहीं आ रहा हैं। पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाली जनसंप्रभु सत्ता प्राप्त संस्था विशालकाय संसद की जगह न्याय पालिका अधिक सक्रिय नजर आ रही है। पूरे देश की आशाएं अब लगता हैं देश की न्याय पालिका पर ही आ टिकी हैं। न्याय पालिका अपने ऊपर आये दायित्व की भूमिका बखूबी निभा रही हैं। उस पर देश को फक्र ही नहीं पूरा विश्वास भी है। हमारी विधायिकाओं को इस विसंगति को दूर करने के लिए अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। मतदाता अपना काम अच्छी तरह कर रहे हैं। संभवत: अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बिहार विधान सभा के चुनावों में विजय का सेहरा स्पष्ट बहुमत के साथ बीजेपी के सिर बांध दे तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गठबंधन की जगह बिहार की स्पष्ट विजय भारतीय प्रजातंत्र के सिर पर ताज चढ़ाने जैसा ही होगा। जो आज का जागरूक मतदाता ही कर सकता हैं।

इसी साल के आखिर में पश्चिम बंगाल की विधान सभा के होने वाले आम चुनावों में मतदाता बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देकर भारत के प्रजातंत्र के ताज में किंगपिन लगाकर भारतीय प्रजातंत्र को विश्व सिंहासन पर बैठाने के लिए आगे बढ़ा सकते हैं। मतदाता ही हैं जिसने पहले पश्चिम बंगाल में 40 वर्षों से चले आ रहें कम्युनिष्टों के एक छत्र राज को उखाड़ फेंक प्रदेश की बागडौर ममता बैनर्जी की पार्टी तृण मूल कांग्रेस को सौंपी। अब आगामी चुनावों में बंगाल की जनता अपने प्रदेश की सत्ता राष्ट्रीय राजनीतिक दल बीजेपी के हाथों में देकर अपना राष्ट्रीय कर्तव्य पूरा कर सकती हैं। इसी के साथ हमारे दायित्व में भी बहुत अधिक गुरूत्तर वृद्धि होगी। अहम के चलते विजय को हल्के में लेने के नतीजे के संकेत भी प्रजातंत्र दिल्ली में ऐतिहासिक बहुमत देते हुए आप की सरकार बनाकर दें चुका हैं। जनता ने दी इस ऐतिहासिक विजय के बाद से दिल्ली में जो कुछ जंग की नजीब खींची जा रही है। वो शायद जनता को भा नहीं रही। दिल्ली दूसरों को सौंपकर तो जनता ने केवल लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को धरातल पर लाया है।
                      
 प्रजातंत्र में विपक्ष की भी उतनी ही अहम् भूमिका होती है, जितनी सत्ता पक्ष की। दृड़ इच्छा शक्तिशाली वाला विपक्ष सत्ता को विरोध के साहारे सतर्क-सजग रखकर प्रजातंत्र को पूरा करता है। स्वतंत्रता के बाद गांधी जी ने तो भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की सार्वभौम धरोहर को संजोकर रखने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक राजनीतिक दल बनाने का विरोध किया था। गांधी जी का कहना था भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की ये विरासत भारत को युग-युग तक एकत्व के साथ संघर्ष करने की प्रेरणा देती रहेंगी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लंबे संघर्ष से मिली मूल्यों की ये दुर्लभ धरोहर कभी राजनीतक तौर पर भी लांछीत नहीं होगी। अनेकता में एकता रखने वाले भारत के हर नागरिक के लिए एक समान सम्मानीय, अनुकरणीय होगी। भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक राजनीतिक दल में बदलने के बाद भी गांधी जी ने कईं बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को समाप्त करने की बात उठाई थी। लेकिन अवसरवादियों के सामने गांधी जी की एक नहीं चली।
 गांधी जी के इस दूरगामी विचार को बीजेपी ने अपने प्रचार तंत्र के अंग में भी शामिल किया है। ऐसे में देश की राजधानी में आप के साथ चल रही बीजेपी की खटपट की कैसे आशा की जा सकती है। देश के मूल्यों की अनदेखी से रसातल में पहुंच चुकी कांग्रेस के विकल्प के तौर पर आप उभरने को बेताब हो रही है, तो होने दिया जाय। दिल्ली में आप की विजय कोई हमारी पराजय न होकर लोकतंत्र में मिलने वाले संकेत के समान हैं। 
हाल ही में सरकार द्वारा कुछ अश्लील वेबसाइटों को बंद करने और मुम्बई बम धमाकों के आरोपी को फांसी देने के बाद कवरेज करने वाले कुछ टी.वी. चैनलों को नोटिस दिए जाने के कारण हमारा विरोध गलत हैं। अश्लील वेबसाइटों को बैन कर सरकार ने ऐसा क्या गलत कर दिया। इससे हमारे बच्चें और संस्कृति दोनों ही सुरक्षित हुए हैं। वहीं सांप्रदायिक सदभाव बिगड़ने की संभावना के चलते संवेदनशील कवरेज बैन होने से तो कोई अनचाही अनहोनी ही निर्मूल हुई है। ऐसी सकारात्मक सोच ही हैं जो हमारे देश को ऊंचाईयों पर ले जायेंगी। हम सीना फुलाकर गर्व से कह सकेंगे हम हैं भारतवासी ........... ! एक साथ सारे देशवासियों का राष्ट्र ध्वज को सैल्यूट ..........!  सदा लहराता रहे हमारा अमर तिरंगा ......... !
(इदम् राष्ट्राय स्वा: , इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम् ..... !)       

Sunday, 14 December 2014

व्यथाओं की दहलीज पर नव वर्ष की दस्तक

 स्वागत ..... वंदन ..... अभिनन्दन .... !

शुभ मंगलमय राह की तलाश में पथराती आंखें

नव वर्ष - 2015 की अगवानी करने के लिए विश्व के साथ–साथ भारत की जनता भी आतुर हैं। निरंतर ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित रहने वाला भारत देश भी आज अपने भविष्य को लेकर व्यथित हो उठा है। आसमान छूती महंगाई, हिलोरे लेती अर्थव्यवस्था, दरवाजे पर भौंकते आतंकवाद, बेलगाम हुए भ्रष्टाचार और सार्वजनिक जीवन में सबसे नींचले स्तर को छूते नैतिक मूल्यों के ग्राफ के बीच आज हम नव वर्ष 2015 के स्वागत में जश्न मनाने के लिए तैयार हैं। भविष्य की स्थिरता और उन्नति की राह की तलाश में भारत की जनता की नजरें पथराती जा रही हैं।
विश्व के साथ-साथ भारत का जनमानस भी अपने सुखमय  भविष्य को लेकर व्यथित हो उठा हैं। वह एक विशेष प्रकार की कुंठा में जकड़ा हुआ अपना जीवन बिता रहा हैं। ऐसे विपरित समय में भरे मन से ही ठीक लेकिन खुश होकर अपने भविष्य के लिए शुभ मंगलमय राह की तलाश में जमकर खुशियां मनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा हैं।
भारत का नागरिक इस नये साल के राष्ट्रीय कहो या अंतर्राष्ट्रीय भोर समारोह में मग्न होने में वह कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता। इस अंतर्राष्ट्रीय भोर समारोह का केवल एक धर्म है, मानव विकास की राह पर चलकर सुखमय जीवन व्यतीत करें। वह पूरी तरह इस जश्न में डूब सा गया हैं। बस भारतीय नागरिक की यहीं वो बात है, जो उसे अवश्य ही शुभ मंगलमय की भावी राह पर ले जायेंगी। यही वो तत्व है, जो हमारे देश को हर कठिन समय में उत्साह और उमंग से भर देता है। घोर अंधेरे में भी भारत अपने ज्ञान के जरिए, विपरित राह की जगह उचित राह अपना लेता है। इसीलिए हमारे देश का नामकरण हमारे पूर्वजों ने निरंतर ज्ञान से प्रकाशित रहने वाले भारत नाम से किया। इसी ज्ञान के प्रकाश से भारत शाश्वत रहा है, और शाश्वत रहेंगा।
देश में महंगाई सातवां आसमान छूने की कहावत बोल रही है। महंगाई ने नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को दूभर कर दिया है। वो अब रोजना सस्ता भरपेट भोजन की आशा भी नहीं पाल पा रहा हैं। अच्छे कपड़े पहनकर जीवन बिताने की बात तो दूर। रहने के लिए एक पक्के मकान के बारे में तो एक सामान्य व्यक्ति के लिए सोचना तक मना सा हो गया है। मकान बनाकर – लेकर रहना तो एक सपना बन गया, जो भविष्य में शायद ही कभी साकार हो।
भारत की अर्थव्यवस्था आज ऊंची कूद की छलांग लगाने को तैयार है। इस ऊंची कूद के बाद अर्थव्यवस्था में बनने वाला ग्राफ भी इसी ऊंची कूद की छलांग की प्रक्रिया में ऊपर की ओर अर्ध पैराबोलिक (अर्ध परवलयिक) बनेगा। ये अर्ध पैराबोलिक ग्राफ अपने सर्वोच्च शिखर पर उच्चतम बिन्दु को छुकर कुछ समय के लिए समतलता लिए होगा। अर्थव्यवस्था की ये समतलता कुछ समय के लिए हमारी अर्थव्यवस्था का सबसे पिकअप पाइंट के साथ पिकअप रन-वे लिए होगी। भारत आज संसार की सबसे उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। प्राकृतिक और मानव संसाधन के लिहाज से आज देश सबसे आगे है। हिन्दुस्तान पर विश्व के कोने-कोने के निवेशकों की नजरें हैं। इसमें कोई दो राय नहीं, हम आगामी कुछ सालों में संसार में सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनेंगे। हमारी अर्थव्यवस्था छलांग लगाकर ग्राफ के सबसे उच्चतम बिन्दु को छुएंगी। तरक्की के इस उच्चतम शिखर के बाद आर्थिक क्षेत्र में स्थिरता या समतल रास्ता आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
अर्थव्यवस्था के हिलोरे लेते इस भंवर में सर्वहारा वर्ग का मन व्यथित हो उठा है, आखिर देश में धन-धान्य की प्रगति – विकास किसके लिए ? तरक्की के समतल रास्ते पर कौन अपने स्थिर कदम बढ़ा पायेंगा ? आखिर विकास के उस भावी समतल रास्ते पर दौड़ने वाला कौन होगा – केवल पूंजीपति या सर्वहारा वर्ग भी ? जन का मन ये सोचकर व्यथित हो उठा है कि चल रही अर्थव्यवस्था की दौड़ में कैसे सर्वहारा वर्ग पूंजीपति के साथ अपने कदम साधकर दौड़े। ताकि भावि विकास की समतल राह पर सर्वहारा वर्ग पूंजीपति के साथ मैराथन दौड़ में भागने में मुकाबला कर सकें। 
बिगड़े पारिस्थिकीय संतुलन के चलते प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या, आंतरिक कानून एवं न्याय व्यवस्था और आतंकवाद के साये ने सरकार पर बेमतलब बेसुमार खर्च बढ़ाकर विकास के काम की जगह पुनर्वास के काम में उलझा दिया है। अप्रत्याशित तौर पर बार-बार आने वाले इस भारी-भरकम अनचाहे आर्थिक व्यय ने एक ओर हमारा विकास अवरूद्ध किया हुआ है। वहीं दूसरी ओर विकास की राह में रोड़ा बताने का बहाना सरकार के हाथ में थमा दिया है। जो जन मन को बहुत व्यथित किए हुए है।
बेलगाम हुए भ्रष्टाचार पर रस्साकसी हमें सोने नहीं दे रही है। भ्रष्टाचार पर ये रस्साकसी हर समय हमारी आंखों के सामने झूल रही है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर सवारी करने वाला कोई तारणहार सवार हमें नहीं मिल रहा है। इस तारणहार को भी जन मन ही ढूंढ सकता हैं। कोई राजनीतिक दल या संगठन नहीं ! इसके लिए मतदाताओं को परिपक्व मानसिकता के साथ वोटिंग कर संकट मोचक को चुनना होगा। भ्रष्टाचार के प्रपात से बनने वाला भंवर और बढ़ा ही होता जा रहा है। कोई भ्रष्टाचार के इस बढ़ते भंवर को बहता पानी बताने का प्रयास कर रहा हैं, तो कोई उसे खत्म करने की बात कर रहा है। कोई तो भंवर को बताकर हमारी नजरों से ही ओंझल करने के प्रयास कर रहा हैं। गलत तरीके से धन एकत्रीकरण के बढ़ते इस दायरे ने जन मन के साथ मस्तक को भनभना दिया है। देश में काले धन पर लगाम होती तो आज हमारी ये आर्थिक हालत नहीं होती।
सार्वजनिक जीवन में सादे और उच्च विचारों वाले लोगों की लगातार घटती संख्या ने जनमानस को चिंता में डाल दिया है। अब ऐसे सदाचार लोग उंगलियों पर गिनने लायक ही बच गये हैं। भविष्य में शायद हमें साधारण दिखने वाले ऐसे सर्वोच्च लोग उंगलियों पर गिनने को नहीं मिलेंगे। जनता का दिल मानने लगा है कि देश में सभी समस्याओं की जड़ में सर्वमान्य और अच्छे नेताओं का अभाव ही हैं। व्यवस्था की इस कमी को परिपक्व प्रक्रियाओं का विकास कर ही पूरा किया जा सकता है। सर्वमान्य और अच्छे लोगों के आने की पुरानी आशा करना अब पुरानी हो गई है। सार्वजनिक दायित्व को अब पूरी तरह चलित, तार्किक और युवा बनाकर ही इस कमी को पूरा किया जा सकता है। सार्वजनिक दायित्व को सभी के उपयोग का हक बनाकर इसे समाज में पूरा विस्तार मिलें। भाई-भतीजावाद से परे ढांचा पूरी तरह पारदर्शी बनें।
परेशानियां चाहे कितनी हों ..... !  इन जकड़ी हुई आर्थिक  परिस्थितियों में हम भारतवासी इस नये साल की पूर्व संध्या पर नव वर्ष के जश्न को जमकर मनायेंगे। पूरी तरह मग्न होकर इस नये साल की अगवानी में कोई कमी नहीं छोडेंगे। इस नये वर्ष के जश्न से हम एक नया उत्साह, उमंग और भरपूर आत्म विश्वास लेकर बाहर निकलेंगे। जो आगामी कठिन परिस्थितियों को हमारे पक्ष में करने के लिए बल देगा। हम इस कठिन दौर का सामना कर बाहर निकल खुली हवा में सांस लेंगे। हम एक भावी सुखद भविष्य में निवास कर बिना किसी व्यथाओं के स्वतंत्रता से विचरण करेंगे।
छलांग लगाने को तैयार, उभरती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था के इस प्रारंभिक दौर में पिक रन-वे (Run Way) के पहले हमारे लिए एक आसियाना अवस्य बनायेंगे या लेंगे। हमें मालूम है, अर्थव्यवस्था के विकास के सर्वोच्च बिन्दु के बाद तो मकान के दाम आज के भी चार गुना होंगे। रोटी और कपड़ा की भावी व्यवस्था के लिए धन के बचत की राह पर तेज कदम बढ़ाना शुरू कर देंगे। अंदर और बाहर न्याय एवं कानून व्यवस्था को सुधारने, आतंकवाद का मुंह कुचलकर मानव जीवन को शांत माहौल देने और  सार्वजनिक जीवन में सद् विचार वाले लोगों की कमी को पूरा करने के लिए आने वाले चुनावों में हम भारतवासी एक दल की स्थिर सरकार बनाने वोट करेंगे। जकड़ी हुई बेड़ियां अधिक देर तक हमें बांध नहीं रख पायेंगी। आने वाले समय को ज्ञान के प्रकाश से हमारे पक्ष में कर लेंगे। अर्थव्यवस्था में पूंजीपतियों के साथ सर्वहारा वर्ग की रफ्तार पकड़ती इस तेज मैराथन दौड़ में हम सब अपना – अपना हित साधकर अपने आपको ही नहीं समाज के साथ – साथ राष्ट्र को भी गौरवान्वित कर अपना भावी समय सुखमय बनायेंगे।
हमें परेशानियों का ज्ञान हैं, लेकिन निराशा नहीं। धुंआ उड़कर आंखों में जाने पर कुछ न दिखने या समझ में न आने वाली कुंध या भैराने जैसी हमारी स्थिति नहीं हैं। हम धुंए से भले ही घिरे हुए हो लेकिन भैराये हुए नहीं हैं। भारत ज्ञान से निरंतर प्रकाशित रहने वाला देश है। सर्व मानव धर्म के इस अंतर्राष्ट्रीय पर्व की पूर्व शाम पर भारत हमेशा सराबोर रहा हैं ....... हैं ........ रहेंगा ....... ! बेमन से नहीं पूरे आत्मबल से इस नये साल – 2015 की पूर्व संध्या पर हम हिन्दुस्तानियों की एक सुर में आवाज हैं ....... आव्हान हैं ...... नव वर्ष 2015 स्वागत हैं ...... वंदन हैं ..... अभिनन्दन हैं ...... ! हम तैयार हैं ........ !
(इदम् राष्ट्राय स्वा:, इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम्)   


Thursday, 13 November 2014

स्वच्छता अभियान के बीच उठी विरासत पर सियासत !

विचारधारा को समृद्ध बनाने और बचाने की होड़


1.  14 से 19 नवम्बर तक देश में चलेगा स्वच्छता अभियान
2.  17 और 18 नवम्बर को पंडित जवाहरलाल नेहरू की उपलब्धियों पर अंतर-राष्ट्रीय सेमिनार
3.  समग्र सफाई केवल हमारे आसपास या राजनीति सहित पूरे सार्वजनिक जीवन की
4.  समग्र सफाई अभियान के बहाने राजनीति तो नहीं ?  
5.  स्वतंत्रता आंदोलन की अगुवाई करने वाला दल कांग्रेस तिलमिलाया

15 अगस्त 2014 को, पूर्ण बहुमत वाली भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार के प्रधान मंत्री ने नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश में समग्र स्वच्छता अभियान चलाने की महत्वाकांक्षी योजना की शुरूआत की। स्वच्छता पसंद और उसे अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने वाले हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिन 2 अक्टूबर से समग्र स्वच्छता अभियान की शुरूआत कर नरेन्द्र मोदी ने देश का दिल जीत लिया। उन्होंने क्लीन इंडिया का नारा देकर अपनी राजनीतिक इच्छा शक्ति जन-जन के सामने जाहिर की।   
जन-जन की भागीदारी वाली इस योजना का भावी हश्र जो भी हो, लेकिन योजना शुरूआती दौर में सांकेतिक तौर पर ही सही पर चल बड़े जोर-शोर से रही है। लोगों में प्रतिस्पर्धात्मक उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा है। 
जनता की नाराजगी का डर सताने के कारण सभी राजनीतिक दल इसमें शामिल हो रहे हैं। लोग भी समय-समय पर इन राजनीतिक पार्टियों के साथ भागीदारी कर रहे हैं। भले ही प्रधान मंत्री के ध्यान से ओझल होते ही सफाई अभियान को राजनीतिक कार्यकर्ता और दोनों ही भूल जाते हैं। सफाई अभियान देश में अभी उच्चतम और निम्नतम स्तर के ग्राफ से चल रहा है। इन सब व्यावहारिक कठिनाइयों के बावजूद प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी अपने व्यस्तम समय में से कुछ समय निकालकर विशेष समयों पर देश में सफाई अभियान में भाग ले रहे है। प्रधान मंत्री के इन कदमों से लोगों में सफाई के प्रति जागरूकता का संचार हो रहा है। प्रधान मंत्री के बार-बार आव्हान का देश के जनमानस पर गहरा असर हो रहा है। फिर भी, देश में समग्र स्वच्छता अभियान तब तक सफल नहीं हो जब तक लोग उसे व्यक्तिगत नैतिक दायित्व न बना लें। बस एक यही काम है, जिसे हमारे देश की जनता को स्वच्छ भारत बनाने के लिए करना है।
अब आधुनिक भारत के निर्माता कहलाने वाले पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती 14 नवम्बर, बाल दिवस से लेकर देश की आयरन लेडी के नाम से पहचानी जाने वाली पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिन 19 नवम्बर तक देश में सघन स्वच्छता अभियान चलाने का आह्वान किया गया है। इस समय को बीजेपी के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष तौर पर सफाई अभियान के लिए चुनने पर देश में बहस चल निकली है। लोग कहने लगे हैं समग्र सफाई के बहाने  कहीं ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को विचारधार विहीन बनाने का प्रयास तो नहीं है ?  बीजेपी के पास पहले से ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद और पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद हैं। ऊपर से बीजेपी गांधीवाद को अपने संविधान में शामिल कर विचारधारा को समृद्ध बनाये हुए है। उचित और तेज  कदम बढ़ाते हुए।
कांग्रेस द्वारा हांसिये पर धकेले हुए, भारतीय बिस्मार्क को बीजेपी ने राष्ट्रीय सम्मान की मुख्य धारा में लाकर सरदार वल्लभ भाई पटेल की विचारधार को ले लिया। सबसे पहले बीजेपी ने सरदार पटेल की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा लागाने की घोषणा की। फिर देश भर में रन ऑफ युनिटी का आयोजन किया। इसके बाद 31 अक्टूबर 2014 से सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिन को देश भर में एकता दिवस के रूप में मनाना प्रारम्भ कर दिया। रही बात जयप्रकाश नारायण और उनकी समग्र क्रांति की तो बीजेपी समय-समय पर लोकनायक की इस विरासत पर के प्रति भी गहरी संवेदना जताती रही है। 
वैसे भी जयप्रकाश नारायण आपातकाल के दौरान बीजेपी की पूर्वगामी भारतीय जनसंघ के संगी-साथी रहे है। जयप्रकाश नारायण ने इस कठिन समय में देश को एक ओर लोक नेतृत्व दिया तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आपातकाल का विरोध करने में सबसे अधिक बढ़-चढ़कर भागीदारी की है। ऐसे में बीजेपी समग्र क्रांति को अपने दायरे में पूरी तरह लेकर कभी भी देश के विकास के मार्ग के दर्शन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय के साथ शामिल कर सकती है। भारत की पूरी स्वतंत्रता के लिए सपना देखने वाले गरम दल के नेता आजाद हिन्द फौज के कमॉण्डर सुभाष चन्द्र बोस को बीजेपी ने नीरस मन से याद भर करने की जगह राष्ट्र की मुख्य धारा में सम्मान देकर अपना बताना प्रारंभ कर ही दिया है। देश की स्वतंत्रता में क्रांतिकारियों के योगदान की अनदेखी सहन नहीं होने के कारण बीजेपी ने अब चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल जैस अन्य सभी क्रांतिकारियों को भी देश के लिए वंदनीय बनाने का काम करना प्रारंभ कर दिया हैं। बीजेपी ने अब गांधी और सुभाष की नरम और गरम दोनों विचारधाराओं के साथ क्रांतिकारी विचारों को भी देश के लिए सामयिक करार दे दिया है।  
अब कहा जा रहा है, समग्र स्वच्छता के बहाने बीजेपी कांग्रेस के इन दोनों बड़े नेताओं पर डोरे डाल रही है। इससे बीजेपी नेहरू और इंदिरा की विचारधारा पर कब्जा कर कांग्रेस को विचारधारा विहीन बनाना चाहती है। बीजेपी के इस कदम से कांग्रेस तिलमिला उठी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के जीवन पर इसी दौरान 17 और 18 अक्टूबर को दो दिवसीय अंतर-राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया है। सेमिनार में देश के सभी विपक्षी दलों के प्रमुखों सहित विश्व के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को बुलाया हैं।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रण नहीं दिया गया। इस सम्मेलन में पंडित जवाहर लाल नेहरू के
जीवन की उपलब्धियों को देश के सामने रखा जायेगा। उन्हें प्रचारित किया जायेंगा। नेहरू के कार्यों पर शोध का रास्ता साफ किया जायेगा। नेहरू - इंदिरा की विरास को नष्ट करने का आरोप लगा रही कांग्रेस के पास से इन दोनों लोगों को बीजेपी अपनी झोली में खींच लेती है, तो कांग्रेस के पास विचारधारा के नाम पर ना के बराबर ही बचेगा। बस आगे खड़ी होगी एक पूर्ण समृद्ध विचारधारा वाली पार्टी बीजेपी। जिसके पास विचारधारा के नाम पर भेदभाव का कोई आरोप नहीं होगा। बीजेपी विपक्ष को विचाराधारा से ही बेदखल कर देंगी ? भविष्य अब बीजेपी की तरह विपक्ष के जीवन में आगामी 65 सालों तक सत्ता में आने का मुंह ताकने का काम देने की तैयारी न कर रहा हो ?  ऐसे में सकते में आयी कांग्रेस विचारधारा को बचाने अब अनेक आयोजन करने लग गई है।
हालांकि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी इस क्रिटिकल समय में आगामी 20 नवम्बर तक विदेश यात्रा पर है। 17 से 19 नवम्बर तक चलाये जाने वाले इस समग्र स्वच्छता अभियान को वे अपने साथियों पर छोड़ गये है। नेहरू के जीवन पर कांग्रेस के द्वारा बुलाया गया ये अंतर-राष्ट्रीय सम्मेलन मोदी के प्रभाव से शायद दूर रहें। लेकिन नरेन्द्र मोदी अवश्य ही देश में एक विशेष बहस छोड़ विदेश चले गये है। देश का विचार इसे राजनीतिक विरासत को समृद्ध करने या बचाने की सियासत मान रहा है ?

(इदम् राष्ट्राय स्वा: , इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम्)