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Thursday, 25 January 2024

विकसित होता हमारा गणतंत्र, भविष्य का समृद्ध और शक्तिशाली भारत, 75 वे गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 2024 पर विशेष

आध्यात्मिक संस्कृति और नैतिक परंपरा में समृद्ध भारत आज दुनिया में तीव्र गति से विकसित हो रहा गणतंत्र है। भारत ने आने वाले 23 वर्षों सन 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने का अपना लक्ष्य बना लिया है संकल्प ले लिया है।  भारत ने अपने चौमुखी विकास की इस समय अवधि को देश के लिए अमृत कहकर कहकर संबोधित किया है कर रहा है। आज गणतंत्र को बनाने, त्याग और बलिदान देने वाले हमारे पूर्वजों के योगदान को याद करने के साथ आज हम कहां पहुंचे, कहां है, और कहां जा रहे हैं, हमारा भविष्य क्या है, लक्ष्य क्या है का आकलन करना, देखना अहम है। अन्यथा गणतंत्र के बारे में हमारी सोच अधूरी रह जाएगी।
कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली निजी अर्थव्यवस्था वाले देशों में यूनाइटेड किंगडम को पीछे कर भारत ने विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान पा लिया है। और सभी क्षेत्रों में भारत के विकास का ग्राफ ऊंचाइयों की ओर बढ़ता जा रहा है। आज भारत की सैन्य क्षमता ने दुनिया में एक अहम स्थान ले लिया है। और सभी शक्तिशाली देश भारत की विकसित सैन्य क्षमता को समझ गए हैं आभास कर लिया है। सभी भारत को अपना बनाने के लिए आतुर हो रहे हैं।
आने वाले समय में भारत की भूमिका को अहम मान रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद भारत की विदेश नीति आज सबसे सफलतम विदेश नीति है। विश्व बंधुत्व और वसुदेव कुटुंबकम की परंपरागत रहा पर चलने वाली भारत की निडर, निष्पक्ष और स्वतंत्र रहा पर चलने वाली भारत की गुटनिरपेक्ष की नीति की ओर आशा लगाते हुए एक सुखद भविष्य और शांत भविष्य की कामना आज पूरा विश्व भारत से कर रहा है। पूरी दुनिया आशा लगाई बैठी है। दुनिया भारत के साथ अपने आप को सुरक्षित मान रही है।
आज संसार के सभी देश भारत को सहोदर मानकर भारत को आदर , सम्मान दे रहे है। अब सब भारत की ओर किसी प्रकार की हेय दृष्टि, दोयम दर्जे, एक निर्बल की छवि और एक पिछल्गु वाली भारत की छवि विश्व समाज के भाव से बाहर निकल गई है। हमारे पड़ोसी दुश्मनों ने भी हमारी स्थिति को भाप लिया है। दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाले प्रजातंत्र भारत में नारी सशक्तिकरण का भी अमृत कल चल रहा है। भारत ने सभी क्षेत्रों में महिलाओं को प्रवेश देकर अपनी इच्छा शक्ति व्यक्त कर दी है।
भारत ने देश की विधानसभाओं और देश की सर्वोच्च संप्रभु सत्ता प्राप्त संस्था लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण देकर भारत ने अपनी राजनीतिक इच्छा शक्ति को मजबूत बना दिया है। देश में चल रहे आर्थिक उदारीकरण और पूंजी के बढ़ते केंद्रीकरण की आंधी, कौंध में भारत सरकार गति से सर्वहारा और गरीब, बेसहारा, निचले तबके को सामाजिक सुरक्षा कवच दे रही है। चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, लड़का हो या लड़की, बुजुर्ग हो या प्रताड़ित, निराश्रित हो या बेसहारा, या अन्य कोई जरूरतमंद अंतोदय। सभी को चिंता से मुक्त करना भारत सरकार की जिम्मेदारी बन गई है। पांच सर्दियों मे सही आज भारत के राम मंदिर के बन जाने से भारत की अस्मिता स्थाई आकर ले लेने से भारत का राष्ट्रीय स्वाभिमान गर्व से भर गया है। भारत का बहुसंख्यक समाज प्रफुल्लित है। सबको साथ लेकर, सबका विकास करने वाली भारत की श्रीराम संस्कृति सबको, सबके सहयोग से अगुवाई करने का अवसर देने को तैयार हो गई है। भारत की राजनीति सभी को सहयोग देने, लेने और आशा के अवसर उपलब्ध करने में भारत सरकार संबल बनाकर आगे आ रही है। भारत के लोगों का लोहा आज दुनिया सभी क्षेत्रों में मान रही है। भारतीय आगे निकल रहे हैं। और आज भारत के पास सबसे अधिक युवा जनसंख्या है। जो भारत की समृद्ध पूंजी है। भारत का भविष्य सुखद और समृद्ध है।
विश्व में आई महामारी कोविद-19 कोरोना में सभी देश वालों का सहयोग करते हुए। महामारी से बचाने वाली अर्थव्यवस्था सबसे अग्रणी और मजबूती से स्थिर बने रहने वाली अर्थव्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था है। कोरोना अंतरराष्ट्रीय संकट ने भारत की छवि को विश्व सहयोग की सक्षम छवि में दुनिया के समक्ष ला दिया है। केंद्र सरकार ने भारत की मंत्री परिषद में 60% अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लोगों को भागीरदारी देकर उन्हें सत्ता में सम्मान दे रही है। योगदान ले रही है।
सुनिश्चित कर दिया है। भारत सरकार ने देश में 117 जिले चयन कर इन जिलों को आकांक्षी जिले घोषित करते हुए तेज गति से विकास के मापदंडों पर आगे ले रही है। सदियों से देश में चली आ रही तुष्टिकरण की नीति का अंत कर उसे अंत्योदय में बदल देश में शत प्रतिशत लोगों को विकास के कवरेज में ले लिया है। कृपा दिखाने और आशिक लाभ देने की नीति से बाहर निकाल, उपेक्षित वर्ग का स्थाई सशक्तिकरण कर रही है। देश में काम चलाओ राजनीति का अंत कर दिया है। भारत सरकार पहली बार बड़ी सोच लेकर चल रही है।
आयुष्मान भारत योजना से देश के लोगों को स्वास्थ्य की चिंता और डीबीटी डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर योजना से गरीबों को भ्रष्टाचार और होने वाली अनावश्यक देरी से मुक्ति दे दी है। भारत में हो रहे सभी सुधारो को यहां बताना संभव नहीं है। विकास की राह में भारत के गणतंत्र के हम सभी सहयोगी बने। हर नागरिक अपने विकास में सहयोग ले।
युवा इस शुभ अवसर का उपयोग कर अपना भविष्य सुखद बनाएं। हम सब भारत के गणतंत्र के लिए शुभ मंगल कामनाएं मांगें ।भारत का गणतंत्र एक विकसित, समृद्ध और शक्तिशाली गणतंत्र बने। इसी मनोकामना के साथ ..... !
सभी को धन्यवाद !
सभी देशवासियों को 75 वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2024 की शुभकामनाएं !
जय हिंद ... भारत माता की जय .... वंदे मातरम ..... !

Monday, 2 October 2023

विजय संकल्प अभियान, सीधे संपर्क समाज से समर्थन

मुल्ताई -मासोद विधानसभा भावी प्रत्याशी/उम्मीदवार , भाजपा शासन की रीति नीति और लोक कल्याणकारी योजनाओं पर गांव-गांव, रहा-रहा, घर-घर, द्वार-द्वार और खेत-खेत सीधा संपर्क संवाद , सबका साथ, सबका विकास। सबका विश्वास, सबका प्रयास।। बदलते भारत की बात, सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण, हर घर विकास, मध्य प्रदेश विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 129

"पूर्व दृष्टि " 2023 -  विजय प्रवास, "सीधा संपर्क-संवाद"
( " Forcoster "  2023 - victory migration )
मुलताई विधानसभा का एक ब्रांड एंबेसेडर (Brand Ambassador) बनकर पूरी विधानसभा में भाजपा सरकार की रीति नीति और लोक कल्याणकारी योजनाओं की मतदाता जनता जनार्दन से जमीनी स्तर पर आमने-सामने face to face "सीधा संपर्क-संवाद' One To One कर लोगों की समस्याएं सुनना और उन्हें दूर करने के लिए मदद सहयोग करना, उचित परामर्श देना,   निर्देशन करना देना और सरकार की लोक कल्याणकारी जनहित की योजनाओं की जानकारी आम जनता को देना और उसका लाभ लेने की जानकारी देना बात करना सहयोग देना रास्ता बताना।

कृपया विस्तृत जानकारी और सक्रियता के लिए मेरी फेसबुक आईडी ID - Dinesh Sahu Multai सर्च करने की कृपा करें।

कृपया जन जन तक पहुंचने के लिए मेरी फेसबुक पोस्ट शेयर करके मुझे जनप्रतिनिधि बनने के लिए सहयोग करने की कृपा करें। 

भावी MLA विधायक प्रत्याशी
पांव-पांव वाले छोटे भैया के प्रवास की निरंतरता
# जनता जनार्दन से सीधा संपर्क, सबका साथ सबका विकास सबका सहयोग की अवधारणा को लेकर जनता जनार्दन में आगे बढ़ रहा, जनता के बीच में सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की विकसित होती मेरी छवि, साधारण, स्वच्छ और पारदर्शी उच्च शिक्षित संगठन और शासन प्रशासन और पत्रकारिता तथा राजनीति और सार्वजनिक जीवन के निकटतम प्रभावी अनुभवी विधानसभा क्षेत्र से लेकर प्रदेश स्तर तक अंतर्संबंध मुलताई-मासोद विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी के प्रबल उम्मीदवार l मेरा 2017-18 से लेकर अब तक मुलताई-मासोद विधानसभा के  सभी 292 बूथों (259 गांव) पर कम से कम दो बार और आधे से अधिक बूथों पर दो से अधिक बार ( पहली बार 2018 विधानसभा चुनाव के समय स्वयं के द्वारा किया गया प्रवास + दूसरी बार विधानसभा चुनाव 2018 के तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी माननीय राजा पवार जी के साथ पूरी विधानसभा का प्रवास + तीसरी बार ग्राम पंचायत और नगर पालिका मुलताई के आम चुनाव के समय विधानसभा के आधे से अधिक बूथों पर प्रवास  + 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद से मेरा प्रवास विधानसभा में निरंतर जारी रहा और चौथी बार इन मध्य के 3 वर्षों में 2 से अधिक बार मैं विधानसभा के लगभग सभी गांव का प्रवास कर चुका हूं। + पांचवी बार मध्यप्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2023 के मद्देनजर पूरी मुलताई विधानसभा का पांचवी बार द्वार द्वार प्रवास कर रहा हूं। जो आगामी 30 मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। + छठवीं बार मध्यप्रदेश शासन प्रशासन द्वारा निकाली गई मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के साथ साथ छठवीं बार पूरी मुलताई विधानसभा के सभी सूचीबद्ध 259 गांव का प्रवास किया। मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के समापन दिवस 25 फरवरी 2023 को ( मुलताई विधानसभा के सभी 259 गांव 292 बूथ) मेरा छठवां प्रवास पूर्ण हुआ और मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के साथ भाजपा रीति नीति वाली शिवराज सिंह चौहान सरकार की जन उपयोगी लोक कल्याणकारी नीतियों को जनता जनार्दन के पास पहुंचाते हुए मैं मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023,  5 फरवरी से 25 फरवरी 2023 तक निकाली गई मध्य प्रदेश विकास यात्रा 2023 के इन 20 दिनों में मैं मुलताई विधानसभा के सभी सूचीबद्ध 259 गांव 292 बूथ पर प्रवास करने वाला एकमात्र भाजपा का ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरा और मेरी प्रबल अग्रणी दावेदारी पक्की बनकर सामने आई है। पार्टी द्वारा दिए गए कार्यक्रम के साथ-साथ अब pun: वर्तमान में पहले से चल रहा। घर-घर दस्तक देते हुए डोर टू डोर पांचवी बार 296 बूथों का प्रवास विधानसभा चुनाव 2023 में प्रबल दावेदारी के लिए चल रहा है। द्वार द्वार,घर घर कर रहा हूं। मध्य प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2023 में प्रबल जमीनी स्तर पर दावेदारी के लिए आज दिनांक तक छठवीं बार मुलताई-मासोद विधानसभा के 272/292 बूथों का सघन प्रवास पूरा हो चुका है और आगे प्रवास निरंतर जारी है प्रत्येक बूथ पर 80 परसेंट से अधिक जनता जनार्दन से मिलकर सीधा विस्तृत संपर्क संवाद करता हूं। और अनुमति लेकर योजनाओं और सरकार की नीतियों पर जन इच्छा के वीडियो बनाकर फोटोग्राफ लेते हुए अधिकतम जनता जनार्दन की समस्याओं और उनके द्वारा रखी जाने वाली बातों परेशानी के वीडियो बनाकर और सोशल मीडिया में जारी करता हूं। और पार्टी संगठन तथा शासन और प्रशासन के तक पहुंचाता हूं भेजता हूं। जो सोशल मीडिया के माध्यम से प्रिंट और विजुअल मीडिया तक जाते हैं। मैं मुलताई मासोद विधानसभा का एकमात्र व्यक्ति जिसकी आईडेंटिटी पहचान जनता जनार्दन से सीधी पहचान मुलताई विधानसभा के सभी 292 बूथों पर है। मुलताई मासौद विधानसभा के प्रत्येक गांव और मुलताई नगर पालिका परिषद में मेरी आमजन में प्रभावशाली सक्रिय आईडेंटिटी सार्वजनिक पहचान है । पार्टी को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में विजई बनाने के लिए मैं भाजपा से सर्वोत्तम उम्मीदवार हूं। मतदाता बंधुओं जनता जनार्दन और युवा मतदाताओं का मेरे प्रति जनसमर्थन झुकाव के लिए मैं बहुत-बहुत आभारी हूं। जनता जनार्दन से मेरा विनम्र अनुरोध है मेरी उम्मीदवारी दावेदारी को सशक्त बनाने के लिए मेरे पक्ष में समर्थन आवाज व्यक्त कर मुझे जन सेवा का अवसर देने की कृपा करें। मैं जनता का उम्मीदवार, जनता के लिए, जनता के द्वारा चुना जाने वाला एक योग्य उम्मीदवार हूं। जनता के बीच ही मेरा स्थान है और रहेगा। जनता की सेवा मेरे लिए शिरोधार्य हैं।
# प्रदेश कार्यालय प्रमुख, आर्थिक प्रकोष्ठ, भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश, Please Share Me, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023, विधानसभा मुलताई मासोद से भावी विधायक उम्मीदवार के प्रबल दावेदार, निवासी ग्राम पोस्ट बिहरगांव तहसील प्रभात पट्टन, जिला बैतूल मध्य प्रदेश।

Saturday, 5 March 2022

हम सबके प्यारे "रघु जी" : अमृत महोत्सव 6 मार्च पर विशेष

भारत की संस्कृति विशेष है। जो हमारे पास है। वह दूसरों के पास नहीं। हम जीवन को सनातन निरंतरता से जोड़ते हैं। व्यक्ति के अच्छे कामों के प्रति गौरव अभिव्यक्ति करते हैं। वंदन करते हैं। व्यक्ति में आत्म गर्व का संचार करते है। हमारी आगामी पीढ़ी उनसे सीख लेती है। भविष्य का आधार बनता है। आज रघुनंदन जी ने अपनी उम्र के 75 वर्ष पूरे कर लिए। आज हम उनके जन्म की हीरक जयंती मना रहे है उनके कार्यों, समर्पण और निष्ठा का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। उनका वंदन कर रहे हैं। अभिनंदन कर रहे हैं। 
 चरैवेति -चरैवेति के साथ एक मौन तपस्वी की तरह चलते रहे रघुनंदन। बिल्कुल हनुमान बनकर। एक दशक से अधिक लंबे समय तक भाजपा प्रदेश कार्यालय मंत्री बनकर पार्टी की एक निष्ठ सेवा की। पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार करते रहे उनका सहयोग करते रहे। प्रदेश की राजनीति में भाजपा के लिए सूझ से बाहर का समय। वैसा ही जैसे राम के सामने 100 योजन का समुद्र पार कर अनाचार - अनति को खत्म कर मानव कल्याण का रास्ता बनाना। राजनीति के विपरीत समय में बिना विचलित हुए पार्टी मुख्यालय संभालते रहे।
  सिद्धांतों के पक्के। रघुजी का पूरा जीवन निष्कलंक। उन्होंने संस्कार संघ से लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल- आडवाणी और कुशाभाऊ ठाकरे के सानिध्य से पाए। इस कट्टर राष्ट्रवादी नेता में हिंदुत्व कूट-कूट कर भरा हुआ है जो उन्हें कभी कभी सच बोलने से नहीं रोक पाता है। राष्ट्रवादी ललक के कारण रघुनंदन ने सरकारी शिक्षक से इस्तीफा दे दिया। 1970 के दशक में भारतीय जनसंघ से विधायक चुने गए। और फिर लगन समर्पण को देख उन्हें मुख्यालय संभालने का काम दिया। इसके बाद पार्टी ने रघुनंदन को राज्यसभा में सांसद बनाकर दिल्ली भेजा।
 अपने काम के साथ-साथ अध्ययन और लेखन का अतिरिक्त गुण रघुजी के भीतर लगातार विकसित होता रहा बड़ा आकार लेता रहा। आज रघुनंदन जी ने राजनीति और आध्यात्मा पर अनेक पुस्तकें की लिखी हैं। उनकी इसी मनीषी अध्यात्म विद्वता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें "राम - पथ" गमन को खोजते हुए उसके उद्धार का काम सौंपा। इस दिव्य काम को उनके मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया। आज रघुनंदन मध्यप्रदेश तुलसी प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष बन कर काम कर रहे हैं। प्रतिष्ठान में दिख रहे व्यवस्थित स्वच्छ परिवर्तन मे उनके प्रभाव की झलक को देखा जा सकता है। अब रघुनंदन लेखन और अध्ययन के साथ तुलसीदास जी के संस्कारों उनके उद्देश्यों को पूरा करने में अपना समय दे रहे हैं। हम सबके प्यारे रघु जी हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहें। दीर्घायु... शतायु 100 की उम्र को पार करें। हम सबकी मनोकामना है ईश्वर हमें रघु जी के जन्म की स्वर्ण जयंती मनाने का अवसर दें।

Friday, 4 March 2022

"एक विचार" "एक अनुकरण" बना शिवराज : 5 मार्च जन्मदिन पर विशेष

मैं उस समय से पांव-पांव वाले इस बड़े भैया को जानता हूं । जब से विदिशा लोकसभा के लगभग 1500 गांव कुशाभाऊ ठाकरे, सुंदरलाल पटवा, लखीराम अग्रवाल और कैलाश नारायण सारंग के लोक व्यक्तित्व में पूरे किए। यदि शिवराज ने कुशाभाऊ ठाकरे से लोक सेवा का परम धर्म सीखा। सुंदरलाल पटवा से आक्रामक निडर सार्वजनिक जीवन शैली लेते हुए शिवराज जी ने अपने जन हितेषी व्यक्तित्व को निखारा। तो कैलाश नारायण सारंग ने उन्हें एक निष्ठा लगन दी। उस समय के वरिष्ठ नेता लखीराम अग्रवाल हो या अन्य कोई सभी की जन हितेषी ललक ने शिवराज के जीवन पर एक अमिट छाप छोड़ी और शिवराज अपने जन व्यक्तित्व में एक विनम्र सिंह बनकर उभरे। शिवराज सिंह चौहान के गुरु ने गलती नहीं करने के लिए उन्हें मंत्र "मत चूको चौहान" दिया और सन 2005 से शुरू हुआ शिवराज। 
शिव मतलब लोक कल्याणकारी एक भागीरथ प्रयास। कुछ ही वर्षों में लगने लगा अब मध्य प्रदेश में विकास की गंगा बहेगी प्रगति की गति तेज होगी नई आशा का  प्रदेश में संचार हुआ। आज शिवराज जी के व्यक्तित्व ने उन्हें मध्य प्रदेश का लोकप्रिय जन हितेषी किसान का बेटा बेटियों का मामा मध्य प्रदेश का लोकप्रिय मुख्यमंत्री बना दिया। अपने अथक प्रयासों से आज मध्यप्रदेश में कृषि विकास दर, सिंचाई रकबा, ऊंचाइयों को छू रहे सामाजिक सुरक्षा के स्तर, प्रदेश में बेटियों के निश्चिंत जीवन सम्मान के साथ बेटियों के लिए इस मामा ने अवसरों को सुलभ कराया। हमारे गरीब कमजोर भाइयों के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास का निर्माण कर उन्हें सम्मान गौरव का जीवन दे रहे हैं जो गरीब के लिए बड़े ही गर्व की सम्मान की बात बनी है। आधुनिक लोक राज्य की विशेषता राज्य का कोई व्यक्ति भूखा नहीं सो सकता को साकार करने के लिए कोरोना काल में ही नहीं हमेशा गरीबों के लिए शिवराज में निशुल्क राशन की व्यवस्था की जा रही है। आज शिवराज का जीवन व्यक्तित्व अंत्योदय को निरंतर साकार कर रहा है पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी और कुशाभाऊ ठाकरे के सपनों को पूरा कर रहा है और अपनी मातृभूमि की सेवा लगन भागीरथी प्रयासों के साथ कर रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय से पिछड़ा मध्य प्रदेश किसी भागीरथी मुखिया का इंतजार कर रहा था मध्यप्रदेश में इस खाली स्थान को शिवराज जी ने भरकर पूरा किया है और आज मध्य प्रदेश विकास के मामले में अग्रणी राज्यों के साथ कदमताल कर रहा है और गरीबी के दलदल से बाहर निकल गया है जो शिवराज जी के अथक प्रयासों से संभव हो पाया है।
नागरिकों के अपने विकास, व्यवसाय, वाणिज्य की निजी प्रगति के लिए मध्य प्रदेश वित्त लोन उपलब्ध कराने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है। चाहे बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण, अवसर, लोन और अपने स्टार्टअप शुरू करने हो। युवाओं को एक नए कॉन्फिडेंस आत्मविश्वास में लिया है और उनमें अपने रोजगार स्थापित करने के लिए  मध्यप्रदेश में एक नया आत्मविश्वास जगाया है। शिक्षक, पटवारी, पुलिस सचिवालय और प्रशासन के अनेक क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं के अवसर युवाओं को पिछले 15 वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार ने दिए हैं। शिवराज सरकार के किए गए काम तो अनेक है लेकिन मध्य प्रदेश की लोकप्रिय शिवराज सरकार के सभी काम का उल्लेख करना यहां संभव नहीं है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री का यह लंबा कार्यकाल बिल्कुल उनके नाम को "सत्यम-शिवम- सुंदरम" के समान साकार करता हुआ आगे बढ़ रहा है। जो सच्चे अर्थ में शिवराज सिंह चौहान के जीवन, व्यक्तित्व और उनकी शैली को आसान तरीके से समझा देता है। समझने में सहायक है। शिवराज सिंह चौहान का लोक जीवन एक विचार की तरह आकार लेता हुआ आगे बढ़ रहा है। हमारे लिए एक अनुकरण का रूप लेता जा रहा है। राजनीति के सार्वजनिक जीवन में एक अनुसंधान का विषय बनता जा रहा है जो शोध योग्य है। कहे तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
मैंने भी अपने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संवेदनशील,  उदार, संयम, गंभीर, धैर्य, सहनशील सेवा भाव से प्रेरणा सीख लेते हुए साल 2018 में मुलताई विधानसभा के लगभग 200 से ऊपर गांव का प्रवास "पांव-पांव वाले छोटे भैया" बनकर किया जो आज भी लगातार जारी है। यह उनके जन्मदिन पर शिवराज सिंह चौहान जी को मेरी ओर से एक लोक उपहार है। जियो हजारों साल... शिवराज जी की हमेशा जय हो...विजय हो....! 

Tuesday, 8 February 2022

उत्तर प्रदेश में जीतेगा योगी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2022
भविष्य में विचारधारा ही रहेगी जिंदा, निष्ठा हो जाएगी गौण विलोपित
            उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2022 में मतदाताओं के मन मस्तिष्क पर बना मनोवैज्ञानिक प्रभाव जीतेगा और योगी की विजय होगी। जहां से 2024 के देश में होने वाले आम चुनाव का रास्ता दिल्ली तक जाता है। लोगों को पहली बार उत्तर प्रदेश में शांति और व्यवस्था का सुकून मिला है एहसास हुआ है। व्यक्ति क्या चाहता है अपने जीवन में बेफिक्र चैन। बिना डर के अपने और मां बहनों के लिए स्वतंत्र जीवन। 
उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ की प्रदेश सरकार ने इसी प्राथमिक कार्य को पहले पूरा किया है l प्रदेश से गुंडाराज दादागिरी रंगदारी और माफियाओं का लगभग पूरा सफाया कर दिया है और लोगों को सुशासन दिया है। योगी जी के इसी महत्वपूर्ण प्राथमिक कार्य ने लोगों के ऊपर एक विशेष चमत्कारिक दूरदर्शी मनोवैज्ञानिक प्रभाव उत्तर प्रदेश की जनता में बनाया है उत्पन्न किया है। उत्तर प्रदेश की जनता जनार्दन भली-भांति समझ रही की योगी एक स्वतंत्र निष्पक्ष और निडर मुख्यमंत्री है जो खुद के लिए नहीं समाज देश प्रदेश और जनता के लिए जीता है। किसी वंश परिवार सुप्रीमो या निजी हित के लिए नहीं। योगी जी की साधारण सरल संत छवि इसकी साक्षी है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी ने प्रदेश में राष्ट्रीय स्वाभिमान और आर्थिक विकास को एक नई गति दी है। भले ही उनके द्वारा उठाए गए आर्थिक विकास के कदम इन 2 वर्षों की लंबे कोरोना काल के कारण डगमगाए हो। लेकिन लोगों को इस पर अधिक एतराज नहीं है। उन्हें इसका अहसास है कि लोकहित के लिए जीने वाले अगले मुख्यमंत्री तो योगी आदित्यनाथ जी ही होना चाहिए होंगे और जनता जनार्दन उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाएगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2022 में निष्ठा सबसे अधिक तेज गति से दरकती विलोपित Eliminate होती नजर आई है। लोगों में निष्ठा अब ज्यादा देर नहीं टिकने वाली है। अब व्यक्ति निजी हित के लिए जीने को मजबूर है या कहो बेईमान है या फिर उसकी महत्वाकांक्षा की भूख बढ़ती जा रही है। भविष्य में केवल विचारधारा ही काम करेगी। निष्ठा गौण हो जाएगी।  निष्ठा बौनी हो जाएगी। लगभग समाप्त प्राय हो जाएगी। विचारधारा ही शासन का क्रियान्वयन और दिशा तय करेगी नेतृत्व करेगी। विचारधारा द्वारा चयन किए गए शासक एक अधिनायक की तरह जन सेवा की गुणवत्ता देते रहेंगे। और विचारधारा को क्रियान्वित करेंगे। नागरिकों को केवल विचारधारा को मजबूत करने के लिए निस्वार्थ सेवा करनी होंगी। देश समाज को मजबूत करने के लिए इसे जनता को अपना एक राष्ट्रीय कर्तव्य समझकर पूरा करना है। सीधे निजी लाभ की जगह हमें केवल राज्य की सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ताओं की आशा करनी होगी।
भारत ही नहीं विश्व की प्रभावशाली शासकों में से एक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के राष्ट्रीय तत्वों को मजबूत करने वाले अहम प्राथमिक कार्यो के कारण भाजपा के पक्ष में मतदान की लहर बनी है। देश में प्रधानमंत्री जी के द्वारा किए जा रहे आर्थिक कार्यों सुधारों और नव निर्माण का मतदाताओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है। मोदी जी की सुरक्षा नीति सैन्य नीति और विदेश नीति के लोग कायल प्रशंसक हो गए हैं। ऐसे अनेक कारण है जिन्होंने जनता के मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव उत्पन्न किया है डाला है। भले ही कमी-बीसी (19-20) कुछ हो। लेकिन मोदी योगी की जुगलबंदी का यही वह मनोवैज्ञानिक प्रभाव है जो पुनः विधानसभा 2022 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को विजय दिलाएगा। योगी जी का परचम लहराएगा। योगी की जय होगी।  विजय होगी। योगी आदित्यनाथ पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। होंगे।

Wednesday, 2 February 2022

कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी वर्ष 2021 - 2022

मध्य प्रदेश एक ऐसे अमर कर्मयोगी मौन तपस्वी का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है जिसकी जीवनशैली बाधाओं प्रतिरोधों से ऊपर उठकर रचनात्मक निर्माण अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रही 15 अगस्त 1922 को जन्म लेने वाले मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक पित्र पुरुष कुशाभाऊ ठाकरे की यह विशिष्ट अबाध्य जीवन शैली युवाओं के लिए अपने सामाजिक आर्थिक राजनीतिक और मूल्यवादी जीवन को निष्कलंक निष्काम सेवा भाव से आगे बढ़ाने के लिए एक अमर प्रेरणा अमर संदेश है जिसे हर युवाओं को अपने जीवन में अपनाना चाहिए मूर्त रूप देना चाहिए कि किस तरह हम कुशाभाऊ ठाकरे जी के जीवन आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आने वाली समस्याओं को पार करके अपने जीवन को बाधाओं से रहित बनाते हुए बाधा की चिंता किए बिना अपने जीवन को निरंतर आगे बढ़ा सकते है 
कुशाभाऊ ठाकरे के सामाजिक संबंधों का प्रबंधन भी अद्वितीय था उनसे मिलने आने वाले प्रदेशभर के कार्यकर्ता उनके अन्नपूर्णा भोजनालय में भोजन पाकर तृप्त होते और पार्टी के कार्यों को आगे बढ़ाते भोजनालय का प्रबंधन और देखरेख उनके मॉल मौन साधक बापूजी करते थे एक परम भक्त सेवक के रूप में हनुमान बनकर अपने बड़े भाई कुशाभाऊ ठाकरे जी की सेवा उनके छोटे भाई जयंत ठाकरे जी आजीवन करते रहे दोनों भाइयों का संबंध जीवन बिल्कुल बिना किसी लाभ की आशा के पूरी तरह निस्वार्थ राम लक्ष्मण की तरह था 
नर सेवा को नारायण सेवा मानने वाले प्रखर राष्ट्रवादी कुशाभाऊ ठाकरे के आदर्शों सिद्धांतों और विचारों को मूर्त रूप देते हुए आज मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार दो दशक पूरा करने जा रही है मध्य प्रदेश को विका
स की ऊंचाइयों पर ले जा रही है प्रदेश में कुशाभाऊ की इच्छा अनुसार प्रशंसनीय विकास कार्य किया है और कर रही है 
 जनमानस के बीच सादा सरल और स्वच्छ चरैवेति चरैवेति का खाटी जीवन जीने वाले महान व्यक्तित्व के धनी कुशाभाऊ ठाकरे जी का 28 दिसंबर 2003 को निधन हो गया ठाकरे जी की आत्मा ब्रह्मलीन हो गई और वह हमारे बीच से चले गए 
इस जन्म शताब्दी वर्ष में हम सभी अपनी निष्पक्ष छवि और मेहनत के बल पर मध्य प्रदेश में भाजपा को गढ़ने वाले और अटल बिहारी वाजपेई जैसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री के काल में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंचने वाले इस महान व्यक्तित्व के धनी कुशाभाऊ ठाकरे जी की मूल्य वादी जीवन शैली को अपने जीवन में अपनाकर अपने जीवन को लोक कल्याण का जीवन अर्थ दे सकते हैं यही हमारी ठाकरे जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि कृतज्ञता होगी
 कुशाभाऊ ठाकरे अमर रहे अमर रहे 

Sunday, 31 October 2021

मेरी उम्र , मेरा मध्य प्रदेश - स्थापना दिवस 1 नवंबर 2021 पर विशेष

1966 से मध्य प्रदेश का मैं साक्षी। मेरी आंखों के सामने बीमारु मध्य प्रदेश ने कैसे गंभीर रुप धारण किया, बढ़ता गया, और ऊंचाइयों की ओर बढ़ता चला जा रहा हैं । 1970 के दशक, सोयाबीन आने के प्रारंभिक समय से लेकर गरीबी, बेबसी देखी भोगी। इस बेबस दौर की परिस्थिति ने मुझे अपने समाज, आसपास के लोगों, माता पिता, गांव के लिए कुछ करने प्रेरित किया। और 1984 में निकल पड़ा राजधानी भोपाल, करने लग गया सिविल सेवा की तैयारी। तभी से मैं मेरे प्रदेश की विकास यात्रा से निरंतर अपडेट होता रहा। 
 1990 के दशक में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों को पढ़ाया जाता था। मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक भागीरथी मुख्यमंत्री की जरुरत है। जब तक मध्य प्रदेश को भागीरथी तप और मानव मात्र की कल्याण की भावना वाला व्यक्ति नहीं मिलता तब तक प्रदेश के विकास की गति तेज नहीं हो सकती। 1990 - 1992 में ढाई वर्ष के लिए सुंदरलाल पटवा जी की सरकार बनी लेकिन विडंबना के कारण यह सरकार गिर गई। केरियर बनाने की उच्च शिक्षित युवा दहलीज ने 1993 से 2003 का स्थिर, दुरुह, विकास का संक्रमण, ठहराव देखा और भोगा है।
अंततः 2003 आशा की प्रभात उदय किरण लेकर आया। प्रदेश में भाजपा की सरकार आई। उमा श्री भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। पंडित दीन दाल उपाध्याय जी का अंतोदय सरकार के कार्यों के केंद्र में आया। अंतिम बेसहारा व्यक्ति का उत्थान शुरू हुआ। मानव सेवा सरकार का मिशन बना। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश की लंबे समय से चली आ रही आशा पूरी हुई। अपने लंबे शासनकाल में भागीरथी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने तप, मेहनत, समन्वय और दूरदर्शी कार्यों के बल पर प्रदेश को आज बीमारु राज्य की श्रेणी से बाहर निकाल लिया हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, मानव संसाधन, तकनीक, वित्त, बैंक, कृषि, सिंचाई, गुडगवर्नेंस, डिजिटल तकनीक, कानून और व्यवस्था सहित लगभग हर क्षेत्र में मेरा मध्य प्रदेश देश के सभी राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए आगे निकलने के प्रयास में कदमताल कर रहा है। आज मेरा मध्य प्रदेश गौरव गान गा रहा है। प्रदेश का हर नागरिक उत्साह, उमंग, स्वाभिमान के साथ गर्व महसूस कर रहा है। स्फूर्ति के साथ आगे बढ़ रहा हैं। प्रदेश और शेत्र के सभी भाई - बहनों को मध्य प्रदेश की स्थापना दिवस 1नंबर की बहुत-बहुत हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं......!
 मेरा मध्य प्रदेश महान
 वंदे मातरम
भारत माता की जय

Thursday, 21 October 2021

मध्यप्रदेश में साकार होता ...... " सत्यम - शिवम - सुंदरम " मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2021

भारतीय संस्कृति हमें अमर संदेश देती हैं। सत्य ही शिव है,  शिव ही लोक कल्याणकारी हैं, लोक कल्याण ही सुंदर है और जो सुंदर है वही सत्य है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस भावना के कारण आज मध्यप्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल 2003 के बाद प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में 526% से अधिक की वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय ₹15442 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति से बढ़कर ₹ 79909 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति से अधिक हो गई है।  जो आप हमें बताता है कि मध्य प्रदेश एक बीमारू राज्य के श्राप से बाहर निकल कर देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में तेजी से अपने मजबूत कदम के साथ आगे बढ़ रहा है। आज मध्य प्रदेश का आम बजट दो लाख करोड़ रुपए प्रति वर्ष से अधिक हो गया है।  
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय विचारों को साकार करते हुए गरीबों के खाने के लिए एक रुपए प्रति किलो अनाज देते हुए उनके लिए प्रधानमंत्री आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए गरीब को रोटी की चिंता से बाहर निकाल लिया गया है और आवास देकर आत्मसम्मान गर्व की जिंदगी दी जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के सपने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को आगे बढ़ाकर आज लगभग सभी गांवों को पक्की सड़क से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील उत्साही और आसावान बना दिया गया है। प्रधानमंत्री उज्वाला योजना ग्रहणी माता बहनों को गैस चूल्हा मुफ्त में देकर रसोई बनाने के काम को आसान कर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है।  
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने फसलों के उत्पादन को अनिश्चितता से बचाते हुए सरकार किसानों को वित्तीय सुरक्षा दे रही है। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ राज्य स्तरीय सीसी सड़क मार्गों का निर्माण तीव्र गति से हो रहा है बन रही सड़क मार्गों की निर्माण गुणवत्ता उच्च स्तर की है जो हमें अपनी आंखों से देखने को मिल रही है। तकनीकी, चिकित्सा, प्रबंधन और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उच्च स्तर के प्रशिक्षित मानव संसाधन को बनाया जा रहा है। प्रदेश में डिजिटाइजेशन को निरंतर नया आयाम दिया जा रहा हैं। अब छात्र छात्राओं के लिए कोई भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए पैसे की कमी नहीं है उन्हें छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण के माध्यम से धन की उपलब्धता आसानी से हो रही है। मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना ने तो छात्रों के सपनों को पंख ही लगा दिए हैं।
 प्रदेश की आर्थिक धार्मिक धमनियों में बहने वाली बिजली का उत्पादन 2003 में केवल 2900 मेगावाट था जिसे अब शिवराज सरकार ने 18384  मेगावाट  से आगे पहुंचा दिया है और आज प्रदेश के गांव में 24 घंटे घरेलू बिजली मिल रही है और किसानों को सिंचाई के लिए 10 घंटे प्रतिदिन बिजली मिल रही है। बिजली उत्पादन में हुई इस वृद्धि से उद्योगों ने भी राहत की सांस ली ली है और निरंतर तरक्की की जा रही है।
 अपने शासनकाल के 10 वर्षों में कांग्रेस सरकार ने 2003 तक प्रदेश में कृषि की विकास दर को 3% से ऊपर नहीं ले जा पाई। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने अपने परिश्रम से मध्य प्रदेश की कृषि विकास दर को 18. 89% से ऊपर पहुंचा दिया है। कृषि निवेश, विपणन, भंडारण और परिवहन की विकसित व्यवस्था ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को एक नया प्रतिस्पर्धी आयाम दिया है। इसका श्रेय किसान पुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जाता है। 0% से नीचे ऋणत्मक ब्याज दर पर खेती के लिए ऋण दिया जा रहा है और समय पर खाद, बीज और कीटनाशक की व्यवस्था करते हुए नई कृषि तकनीक को तेज गति से अपनाया जा रहा है। जिससे पिछले डेढ़ दशक में राज्य में गेहूं के उत्पादन में उत्पादन में 345% से अधिक वृद्धि कर दी हैं। जलाशयों के निर्माण को मिली गति ने प्रदेश में नहरों से सिंचाई के क्षेत्र को शिवराज सरकार ने पिछले 15 वर्षों में 7 से 40 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा दिया है। कृषि फसलों के उत्पादन से किसानों के पास वित्तीय पूंजी निर्माण के साथ-साथ  आय निश्चित होने से किसानों में खेती के प्रति उत्साह का संचार हुआ है। शिवराज सिंह सरकार ने कृषि के लिए बनाए अनुकूल सुविधाओं माहौल ने आज मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादन को 2.14 से सीधे 5.44 करोड़ मीट्रिक टन से आगे ले जा लिया है।
 शिवराज सिंह सरकार ने अपने अथक प्रयासों से मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर को 379 से 221 प्रतिवर्ष पर लाकर मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर को 86 से 47 प्रतिवर्ष पर ले आया है और प्रदेश में 22% से बढ़कर अब  86% से अधिक लोग संस्थागत प्रसव कराने लगे हैं। प्रदेश में अब दो की जगह 36 लाख से अधिक बेसहारा लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलने लगी है। यह लोग अब आत्मसम्मान का जीवन जी रहे हैं। 
गरीबों की सुरक्षा और उनके उत्थान के लिए बनाई गई मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन कल्याण " संबल योजना "  ने तो शिवराज सरकार को मध्य प्रदेश की जनता के लिए पालक गार्जियन बना दिया है और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने पालक सरकार " गार्जियन गवर्नमेंट " का आकार ले लिया है । हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अन्य सैकड़ों योजनाएं हैं जिसने लोक कल्याण को राजधर्म के केंद्र में ला दिया है और अब विकास प्रमुख है। लगता है मध्य प्रदेश में हो रहे एक लोकसभा और 3 विधानसभा के इन चुनावों में जनता लोक कल्याण के लिए सत्यम शिवम सुंदरम को ध्यान में रखते हुए अपना बहुमूल्य मत भाजपा को देकर विजय ध्वज भारतीय जनता पार्टी के हाथों में देगी और देना भी चाहिए। सत्य मेव जयते ... अंततः जन गण मन अधिनायक जय हे ..... !
DINESH SAHU
राष्ट्रीय संयोजक
All India movement for democratic reforms
यह लेखक के अपने व्यक्तिगत विचार हैं

Monday, 18 October 2021

भारतीय जनता पार्टी बेहतर विकल्प - मध्य प्रदेश उपचुनाव 2021

             आज के समय में लोकतंत्र ने विकास प्रशासन का स्वरूप ले लिया है। अच्छे से अच्छा शासन कहलाने के लिए लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा दिनों - दिन बढ़ती जा रही हैं। सभी राजनीतिक दल जनता को अधिक से अधिक सुविधाएं देकर सत्ता में आना चाहते हैं और जनता भी अधिक से अधिक सुख शांति और समृद्धि चाहती हैं जनता छोटे से छोटे कार्य के लिए लोक कल्याणकारी राज्य की ओर देख रही हैं। विकसित देशों की तरह अब जनता का एक केंद्र बिंदु बन गया है - विकास। राजनीतिक दलों और जनता दोनों की निजी हित की विवशता के कारण लोक कल्याण केंद्र में आ गया हैं। मतदाताओं को बहलाने लोभ देने और भ्रम के सहारे उनका उपयोग राजनीतिक दलों के लिए अब गौण बन गया है। अधिकांश जगह केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर अभी भाजपा की सरकार है। मोदी-01 सरकार के बाद अब निरंतर मोदी-02 सरकार राष्ट्र के स्वाभिमान और गौरव को एक निष्पक्ष समान स्थाई दूरदर्शी आयाम देते हुए सेना विदेश स्वास्थ्य शिक्षा कृषि आधारभूत उद्योग और परिवहन के साथ-साथ अन्य सभी क्षेत्रों में विकास को एक सुदृढ़ विकसित स्वरूप दे रही है और अर्थव्यवस्था को निरंतर ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।
 हमारे मध्य प्रदेश के भागीरथी मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने कांग्रेस के समय बीमारू राज्य कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को जनता के लिए मध्य प्रदेश सरकार को गार्जियन पालक सरकार बना दिया है। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की लाडली लक्ष्मी कन्यादान संबल योजना जैसी लोक कल्याणकारी सैकड़ों योजनाओं के साथ कृषि निवेश शिक्षा स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की मामले में प्रदेश की जनता जनार्दन को चिंता मुक्त कर दिया है और जनजीवन के अन्य सभी आर्थिक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को नई ऊंचाइयों पर लेकर गए हैं और ले जा रहे हैं। अपने भागीरथी ईमानदार प्रयासों के कारण ही आज शिवराज सिंह चौहान जी मध्य प्रदेश के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री बनकर उभरे हैं। 
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह दोनों के केंद्रबिंदु में दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद का अंत्योदय विकास है। केंद्र और राज्यस्तरीय खाद्य वितरण व्यवस्था को मजबूत विकसित रूप देकर गरीब को भूखे रहने की आशंका से बाहर निकाल लिया गया है। भाजपा सरकारों की सभी लोक कल्याण की विकास योजनाओं की चर्चा करना यहां संभव नहीं है। 
बदलते राजनीतिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश में हो रहे इन लोकसभा और विधानसभा के इन उपचुनाव में कांग्रेस या अन्य किसी विपक्ष के भ्रम में नहीं आ कर जनता को अपना हित ध्यान में रखते हुए अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के विकास के लिए शासन में सत्ता में बैठे राजनीतिक दल भाजपा को अपना बहुमूल्य वोट देकर विजय बनाना चाहिए और अपने विकास को सुनिश्चित करना चाहिए। मध्य प्रदेश में हो रहे लोकसभा और विधानसभा के इन उपचुनाव में जनता के पास भारतीय जनता पार्टी एक बेहतर विकल्प है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे तो परिणाम जन हितेषी निकलेंगे और इसी में लोक कल्याण निहित है 
                                         दिनेश साहू 
                                    राष्ट्रीय संयोजक
   All India Movement For Democratic Reforms
                    यह लेखक के अपने व्यक्तिगत विचार हैं

Monday, 22 January 2018

गगन को छूने को .... मेरा गणतंत्र 2018

2022 तक भारत होगा एक पूर्ण विकसित राष्ट्र

सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत राजनीति, अर्थ, समाज और धर्म सभी क्षेत्रों में निरंतर ऊंचाईयों को छूता जा रहा है। हमारे महान् स्वपन्न दृष्टा मनीषी पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को सन् 2022 तक एक पूरी तरह से विकसित देश बनाने की नींव रखी थी, उसे हमारे तपस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे ले जाने में लगें है।  

भारत ने आज सबकों संदेश दे दिया है, कि हिन्दुस्तान के मस्तिष्क में साफ है, वो लोकतंत्र वाले गणतंत्र में विश्वास रखता है। हमारे देश का मुखिया एक साधारण से साधारण व्यक्ति बन सकता है। हमारे देश के मतदाताओं की आयु निरंतर परिपक्वता की ओर बढ़ती जा रही हैं। आज हमारी न्यायपालिका की निष्पक्षता के साथ बढ़ती सक्रियता में जन विश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है। हमारी विधायिकाएं गुणात्मक नीतियों का एकत्रिकरण कर रही है। कार्यपालिका में सादगी के साथ सच्चचरित्रता को बढ़ावा मिल रहा है। 
मतदाता हमारे लोकतंत्र से अनिश्चितता और सम्प्रदाय या समाज पर आधारित कट्टरता को बॉय-बॉय करते जा रहे हैं। 2014 के लोकसभा और उसके बाद उत्तरप्रदेश विधान सभा में एक दल को भारी बहुमत देकर लोकतंत्र से अनिश्चित्ता के डर को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया।
भारत की व्यवस्था तेज गति से डिजिटिलाइजेशन के जरिए पूर्ण पारदर्शिता और भ्रष्टाचार से मुक्त होने की ओर बढ़ रही है। हमारे चुनाव धन बल से उपजे बाहुबल के कुप्रभाव से मुक्त होने जा रहे हैं। अब चंदा चुनावी बांड से एकत्रित होने जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में सादगी और सच्चचरित्रा से उत्पन्न आत्मबल को बढ़ावा मिल रहा है। देश के 14 या 14 से कम आयु तक के बच्चों के लिए शिक्षा के मूल अधिकार के साथ गरीब बालक – बालिकाओं को अमीरों की बराबरी करने के लिए देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में 25 प्रतिशत आरक्षित स्थान मिल गए है। 
समानता, सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण हमारे देश के नीति नियंताओं की पहली प्राथमिकताएं बन गए है। आज देश में लोक सेवा, सैन्य और आंतरिक सुरक्षा सेवाओं के उच्च पदों पर महिलाएं अपनी सक्षमता साबित कर रही हैं। वो आज देश की सीमाएं भी संभाल रही हैं। इन साहसी कामों के साथ उसने अब विनियमन के कामों में भी जोरदार हाजरी दे दी है। आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की रक्षा मंत्री एक नारी निर्मला सीतारण है।  हमारा देश आगे बढ़कर आज नीति बनाने के कार्यों में महिलाओं के लिए संसद और राज्य विधान सभाओं में एक तिहाई स्थान आरक्षित कर लिंग भेद को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी कर चुका है। मध्यप्रदेश सरकार ने तो अपने यहां की स्थानीय सरकारों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत स्थान आरक्षित कर बराबरी का दर्जा दे दिया है। मानव अधिकारों के हनन पर आज हमारी बाज नजर है।

लोगों को जगाने के लिए आज देश में आरटीआई, आरटीई, सोसल एक्टिवेटर और व्हिसिल ब्लोअर का जाल फैलता जा रहा है। परम्परा से चले आ रहे डर की जगह आज प्रणोत्सर्ग साहस ने ले लिया है। आज देश की तीन चौथाई से अधिक आबादी को खाद्य सुरक्षा के साथ रोजगार की गारंटी मिल गई है। बाल मजदूरी आज देश विदाई ले रही है। आज भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था बनकर चुनौती देने आगे बढ़ रही है।
परिवार, समाज में बेसहारा लोगों के ऊपर सरकार का साया बढ़ता जा रहा है। आज देश की सेना विश्व की अग्रणी सैन्य सुरक्षा सेवाओं की श्रेणी में आ खड़ी हुई है। हम अब अंतर्राष्ट्रीय पंचायत यूएनओ की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् में स्थान पाने से चन्द कदम दूर है। हमारे पक्ष में विश्व बिरादरी का रूझान लगाता बढ़ता जा रहा है। अस्प्रश्यता देश से लगभग पूरी तरह जा चुकी है। समानता हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है। गलत परंपराओं और  कट्टरता की जगह विकास लेता जा रहा है। अब सब अच्छा और शांत जीवन बीताना चाहते है।

आज हमारा देश एकात्म मानववाद से तेजोमय हो रहा है। अन्त्योदय आज देश का पहला हितग्राही बन गया है। आज भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद विश्व गुरू बनने जा रहा है। हमारा सनातन आशावाद आज दुनिया के लिए जीवन मंत्र बनता जा रहा है, इससे लोगों में जीवन जीने की कला आती जा रही है।
लिखने को मेरे पास और भी है, लेकिन यहां मेरी लेखनी को संदेह के बिना रोकना चाहूंगा। भारत सन् 2022 तक विकसित देशों की श्रेणी में अग्रणी खड़ा होकर विश्व को गुरू संदेश दे रहा होगा।  
   

Wednesday, 13 April 2016

मेरे केन्द्र बिन्दु



हारिये न हिम्मत, विसारिये न हरि नाम।
सीताराम, सीताराम, सीताराम कहियों ।।
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहियों।

होहिये वही वही, जो राम रचि राखा।
को तर्क करिहिं बढ़ावहि साखा।।  
                                  .......... बालकाण्ड
                                      रामचरित मानस

प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु का नियम बदलते देखा।
अपना मान भले टल जाये, भक्त का मान न टलते देखा। 

Saturday, 26 December 2015

मंगलमय हो 2016 का ब्रह्म मुहूर्त

संवेदनशील जीवन को ढूंढता जन जीवन

उम्मीदों के जश्न में ही बेहतर भविष्य की आशा


नये साल पर हार्दिक शुभ कामनाएं



दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत सबसे हटके विलक्षण और संवेदनशील है। सबसे पुराने इस प्रजातंत्र की स्वीकार्यता स्वाभाविक और सुदृड़ है। इसके ऊपर किसी प्रकार का भी संदेह करना, स्वीकार करना या सोचना भी गलत है। ऐसी ही अनेकों दुर्लभ विशेषताएं हैं जिसे गिनाना यहां कठिन हैं। जो दुनिया में भारत को विशिष्ट स्थान दिलाती हैं। अपनी इन्हीं चिरकालिक अलग पहचानों के बल पर अब भारत फिर से एक बार विश्व गुरू बनने की सोच रहा है। आप सोच रहे होंगे नये साल की शुरूआत राजनीतिक चिंतन के साथ ही क्यों ? तो यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार प्रसांगिक लगते हैं। गांधी जी की सोच सटीक थी। उनका कहना था। उन्हें राजनीति करने का कोई शौक नहीं। लेकिन वे राजनीति में फिर भी इसलिय सक्रिय है, क्योंकि राजनीति रूपी विषेला नाग समाज के ऊपर इस तरह पिंडली मारकर बैठ गया कि समाज के लिए उससे मुक्ति पाना नामुमकिन है।  इस विषैले साप का थोड़ा भी जहर मैं कम कर संकू तो मेरा सौभाग्य होगा। बस इसी सींख को ध्यान में रख नये साल के ऊषाकाल में राजनीति की दशा और दिशा पर अपनी सोच लोगों के सामने रखना कोई गलत बात नहीं ! राजनीति ईश्वरीय व्यवस्था के बाद इस दुनियां का सबसे बड़ा विनियामकीय क्षेत्र है। इसके भीतर समाज के सभी क्षेत्र समाहित हैं।

शुरू हो रहे नये साल 2016 के ऊषाकाल में राजनीति तेज गति से करवट ले रही है। प्रकृति में हो रहे परिवर्तनों के समान ही संवेदनशील राजनीति भी धीरे – धीरे गायब होती नजर आ रही है। अब राज नैतिक  न रहकर नीतिक होता जा रहा है। पहले कांग्रेस ने 65 सालों तक भ्रम में उलझाते हुएं देश को मूल्य विहीन बनाने में कोई कोर – कसर नहीं छोड़ी। अपना राजनीतिक हित साधती रहीं। 65 सालों तक देश एक दलीय वंशानुगत राजनीति का दंश झेलता रहा। दुनिया का ये सबसे विशाल लोकतंत्र अपनी एक ही टांग पर कराहता रहा। भारत को एक शक्तिशाली विपक्ष तक नहीं दे पाया। ऐसे में भारतीय जनसंख ने राजनीति के घोर अंधेरे में दीपक की लौ जलाई। लोग उसकी ओर आशा भरी नजरों से देखने लगें। स्वयं सेवकों ने ठंडे पानी में फूले हुए चने बिना नमक मिर्ची के खाकर श्रम किया।  लोग उनके साथ होते गयें। विरोधियों की यातनाएं सहीं। आलोचनाएं झेली। लेकिन एक ही मंत्र चरैवेति – चरैवेति।  कारवां बढ़ता गया। मेहनत रंग लायी। आज लगभग 39 अनुषांगिक संगठनों का संघपरिवार हैं। अब देश में उसके विचारों का राज भी है। भारत के प्रजातंत्र के पास सशक्त पक्ष – विपक्ष। विश्व का एक परिपक्व और पूर्ण लोकतंत्र। यहां संख्या बल के आधार पर पक्ष – विपक्ष को  शक्तिशाली न मानें। बल्कि नये – पुराने दल को भी याद रखें। कभी बीजेपी कांग्रेस की तरह ही नहीं उनसे भी बुरी स्थिति में थी।
पहले अटल बिहारी वाजपेयी 6 सालों तक गठबंधन के बल पर भारतीय प्रजातंत्र को राजनीति के संक्रमणकाल से बाहर निकालने में सफल रहे। उन्होंने एक वोट की भी किसी प्रकार की गलत व्यवस्था नहीं की। एक वोट के अभाव में भी अटल जी ने अपनी सरकार गिरने दी। इतना लंबा राजनीतिक संघर्ष झेलने के बाद भी अपने पास राजनीतिक लिप्सा को फटकने तक नहीं दिया। नैतिक राजनीति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। तब राज नैतिक बनने की आशा बलवती होने लगी। राज की नीति पीछे छुटती नजर आने लगीं। इसके बाद 2014 में लोकसभा के आम चुनावों में जनता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को करारा जवाब दिया। एनडीए गठबंधन के साथ लड़ने के बावजूद पहली बार बीजेपी को अकेले पूर्ण बहुमत दिया। लोकसभा के इन चुनावों में उत्तरप्रदेश की जनता ने 85 सीटों में से 72 सीटें बीजेपी को देकर अपनी आशा को और अधिक स्पष्ट कर सर्वोपरि बना दिया। जहां वर्षों से विखंडित बहुमत आ रहा था। जिसके एकमत होने की किसी ने आशा तक नहीं की थी। संवेदनशील राजनीति पर फिर एक बार देश की आशा बलवती होने लगी। देश उत्साह, उमंग और स्फूर्ति महसूस करने लगा।

आज बीजेपी के शासन को लगभग पौन दो साल होने को आयें। मगर देश की जनता नये साल को मनाने के शुभ अवसर पर किसी ठोस परिणाम की बाट जोह रही हैं। पहले उसने दिल्ली विधान सभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को अप्रत्याशित भारी बहुमत देकर बीजेपी की झोली में 70 में से केवल तीन सीट डालकर संकेत दिया। यहां तक कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी की जमानत तक जब्त करवा दी। इतने बड़े भरे – पूरे परिवार का कुनबा धरा का धरा रह गया। क्योंकि नैतिक मूल्यों की लौ आम आदमी पार्टी लेकर चल रह थी। जो कभी भारतीय जनता पार्टी की पूर्वज भारतीय जनसंघ लेकर चला करती थी। बीजेपी की इस हार के पीछे शायद सबसे बड़ा कारण टिकट वितरण में पार्टी के दीर्घकालीक स्थापित परम्पराओं की उपेक्षा रही हों। फिर बीजेपी के सामने बिहार में आया अपने धुर विरोधियों नीतिश और लालू का बेमेल जोड़। बिहार के विधान सभा चुनाव 2015 में तो बीजेपी अपनी पुरानी जमीन भी बचा पाने कामयाब नहीं हुई। पिछली बार से भी कम सीटों पर उसे संतोष करना पड़ा। इन विधान सभा चुनावों में बिहार की दम तोड़ती क्षेत्रीय राजनीति यहां नहीं जीती। बल्कि संवेदनशील राजनीति का झंडा लेकर यहां पहुंची बीजेपी के लड़खड़ाते कदमों को संभालने के लिए एक बार फिर जनता ने बीजेपी के कान जोर से फूंके। ताकि समय रहते इसे गुरू मंत्र समझ जागे। व्यक्ति निष्ठ बनने के प्रयास न करें। पार्टी निष्ठ ही बने रहे। उपलब्धि और कठिन समय दोनों सामूहिक हो। यशोगान में संगठन की भावना प्रतिध्वनित हो।


बिहार – दिल्ली विधान सभा चुनावों में जो हुआ वो हो भी क्यों न ?  प्रजातंत्र में सशक्त विपक्ष ही तो नियंत्रण का सर्वोच्च साधन होता है। वही तो है जो अपनी रचनात्मक भूमिका से शासन – प्रशासन को स्वच्छ बनाये रखने के साथ उसे सतर्क रख, गलत के प्रति आवाज उठाकर उसमें डर बनाये रखने का काम करता है। बीजेपी को देश की बागडौर सौंपकर अपनी नैतिक मूल्यों की धरोहर को आगे बढ़ाने का पूरा मौका तो देश की जनता ने उसे दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर जनता तो उसके साथ हैं। मगर एक परिपक्व लोकतंत्र राज्यों में भी पूरी तरह बीजेपी को एक छत्र पताका सौंपकर कैसे निरंकुता की ओर बढ़ा सकता हैं ?  खिलखिलाते प्रजातंत्र में ये मतदाताओं की परिपक्वता नहीं तो क्या ?  इससे हमारे राजनीतिक दलों को देश में परिपक्व हो रही मतदाताओं की मानसिक आयु के प्रति आगाह हो जाना चाहिए !  लोकतंत्र परिणामनोम्खी मामले पर संवेदनशील होता है। वोटर उसे सत्ताहीन कर सकता है। चुनाव प्रोपेगण्डा के दौरान होने वाली लोक लुभावन बातें भविष्य नहीं संवार सकती। जनता को धरातल पर मूर्त रूप से महसूस होना चाहिए। देश के प्रत्येक व्यक्ति के खातें में आने वाले 15 लाख रूपयों की चर्चाएं भी अब ओझल होती जा रही हैं। महंगाई से आम आदमी की थरथराहट बढ़ती जा रही हैं। विदेश यात्राएं रोजमर्रा की बात हो जाने के कारण ये लोगों के ध्यान से हटाती जा रही हैं। इन पौने दो सालों में न कोई धरातल पर ठोस निवेश आया, और न ही रोजगार के अवसरों में कोई चमत्कारिक बढ़ोत्तरी हुईं। बस विश्व लेवल पर हमारे उत्साहवर्धक चुनाव परिणामों की एवज में हमारे प्रजातंत्र की झोली में सम्मान और वाहवाही आयें। ठोस आवक नहीं हुईं। पड़ोसी मुल्क से तक चुनावी दौरान हुई चर्चा अनुरूप न कोई संबंध सुधरें और न ही कोई ठोस प्रतिकार नजर आया। पूरी दुनिया में गोपनीय रखते हुए अटल जी द्वारा परमाणु विष्फोट के काम को अंजाम देने से बुद्ध मुस्कराया तो समझ में आता है। लेकिन मोदी जी द्वारा अपनों को विश्वास में लिए बिना अचानक पाकिस्तान जाने से तो लगता है नवाज जरूर मुस्कराया।

आर्थिक सुधार सर्वहारा वर्ग के लिए नींचे से शुरू करने से उन्हें महसूस होतें। ऊपर से होने वाले सुधार तो उन्हें केवल ढांढस ही बंधा पा रहे हैं। सपने जैसा ही लग रहे हैं। लगता है धैर्य की परीक्षा हो रही है। ऊपर से सुधार नींचे वालों के साथ होते तो स्थायीत्व आता। महसूस होत। विकास होता। हम सबका। राज करने वालों और जनता दोंनों का। विधायी कार्यों में भी कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। न्यायिक नियुक्ति आयोग पर कानून बना तो उसे भी न्यायपालिका ने रद्द घोषित कर दिया। राज्य सभा में बहुमत न होने के बहाने से जनता को कोई लेनादेना नहीं। उसे ठोस आकार चाहिएं। जिसमें वो अपने आप को बेहतर तरीके से ढाल सकें। पुराने ही कानूनों की ही कमियों को टटोलने या उनमें सुधार के लिए सुधार के प्रयास करने से काम नहीं चलने वाला हमें समन्वय की राजनीतिक संस्कृति से परिणाम लाने होंगे। हमें अटल – अडवाणी जी की गंभीर संस्कृति को अपनाना होगा। अहं या अतिशय अनुशासन को नहीं आने देना होगा। कांग्रेस तो लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, भारतीय भू-सुधार अधिनियम, भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, रोजगार गारंटी अधिनियम, सूंचना का अधिकार अधिनियम, शिक्षा का मूल अधिकार अधिनियम जैसे समय और लोकोपयोगी अधिनिय बनाकर अलग हो गई। प्रारंभिक दौर के चलते सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं कर पायी। प्रभावी दायित्व अब बीजेपी के ऊपर हैं। वो अच्छे पुराने कानूनों को प्रभावी तौर पर क्रियान्वित कर सकती हैं या इनसे अच्छे समयोंपयोगी कानून बनाकर लागू कर सकती हैं। बीजेपी को समय मिला है। राजनीति में अछूतवाद जैसी कोई चीज नहीं होती वो भी लोकोपयोगी कानूनों के प्रति। कांग्रेस ने जरूर अछूतवाद किया। बीजेपी तो राजनीतिक अछूदवाद के विरूद्ध लड़ने वाली पार्टी हैं। उसने राजनीतिक अछूतवाद के विरूद्ध लंबा संघर्ष किया है। जम्मू एण्ड काश्मीर में पीडीपी जैसी अलगावादी पार्टी के साथ राज्य में सरकार बनाने के पीछे छिपे तर्क भी समझ से परे लगते हैं। वो भी एक वोट के लिए केन्द्र की सरकार गिरा देने वाली सत्यनिष्ठ पार्टी बीजेपी के लिए ऐसे बेमेल गठबंधन।
ऊपर से जम्मू एण्ड काश्मीर में होती बीजेपी की राजनीतिक किरकिरी। उसके स्थापित सिद्धांतों से ही परे लगती है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोकपाल एवं लोकआयुक्त अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर लोकपाल की नियुक्ति के लिए तो अब आम जनता को चर्चाएं तक सुनाई नहीं देती। नियुक्ति नसीब होना तो दूर। जबकि लोकपाल अधिनियम में लोकपाल की नियुक्ति के लिए तय एक साल की समय से काफी अधिक समय हो चुका है। मेरे राज्य में व्यापम काला सच जस का तस है। दूध और पानी कब  अलग होंगे पता नहीं। जबकि मध्यप्रदेश में बीजेपी लगातार 15 वर्षों तक शासन करने का रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। कार्यकर्ता राजनीतिक विलगाव के चलते अवसाद में चला जा रहा हैं। आंतरिक प्रजातंत्र के नाम पर कड़े अनुशासन के सहारे व्यक्तिनिष्ठ पहल सामने आ रही है। राजनीति संवेदनशील होने की बजाय अपनी नैतिक राह से भटक रही है।
आम जन जीवन पर हमारा सोचना लाजमि है। अब इससे आगे नये साल पर लिखने की कलम इजाजत नहीं देती। हां, नवंबर - 2015 में पेरिस में हुए अंतर्राष्ट्रीय ग्रीन सम्मेलन में ग्लोबल वार्मिंग पर उठें ज्वलंत सवालों के चलते हम इस नये साल के अवसर पर हर व्यक्ति एक पौधा रोपकर अस्तित्व के संकट में पड़ते मानव जीवन को ये सर्वोतम् उपहार देकर नये साल के जश्न को झूमकर मना सकतें हैं। एक बेहतर भविष्य की आशा कर सकतें हैं। यहीं शुरू हो रहे नये साल 2016 को सर्वोत्म उपहार होगा। साथ ही हमारा सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी पूरा होगा।
                                       
  (इदम् राष्ट्राय स्वा:, इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम्)


Tuesday, 11 August 2015

वैचारिक द्वंद के घने कोहरे में हम सबका राष्ट्र ध्वज को सैल्यूट

15 अगस्त 2015 पर विशेष


1.   जन-गण-मन ..... की एक स्वर में प्रतिध्वनि हमारी मूल पहचान 

2.   एक निष्पक्ष – चिंता या चिंतन 

3.   हमेशा ऊंचा लहराता रहे हमारा अमर तिरंगा 

4.   देश की आन-बान-शान में जा देने को हम तैयार

5.   गहरी होती कौंध से भरती जनता की आंखें 

6.   नजरों से ओझल होता निकट भविष्य

7.   उथल – पुथल के इस युग में घबरातें लोग

8.   अपने आने वाले दिनों की तस्वीर को साफ देखने लालायित देशवासी 

9.   इन हिलोरों के बाद कंचन बनकर उभरेगा देश 

10.                   दुनिया की अंगुवाई करने हम तैयार

  
 हर साल की तरह फिर आज हम स्वतंत्रता दिवस की बेला में खड़े हैं। खुशी के साथ चिंतन और मनन को लेकर आने वाले इस राष्ट्रीय पर्व को हम मनाने जा रहे हैं। 15 अगस्त की सुबह उत्साह और उमंग की ऊर्जा के साथ एक बार फिर हम सब भारत के लोगों का एक स्वर में राष्ट्र ध्वज को सैल्यूट .......... !  हर संकट की घड़ी में हम सभी एक, देश हर दम एक साथ खड़ा – यहीं हम सबकी विशेषता। अच्छे विचारों को सामने लाने के लिए आंतरिक तौर पर वैचारिक मत भिन्नता जरूरी …… !  इन सबके बावजूज सबसे पहले दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए जवानों के साथ हम सब हर पल तैयार .... सजग ....... सतर्क ...... संवेदनशील ....... ।
स्वतंत्रता दिवस याने हमारे उन पूर्वजों के संघर्षों की यादों को संजोने ...... याद करने ..... उनके बतायें रास्ते पर चलने के लिए प्रेरणा लेने का दिन ...... जिन्होंने 180 वर्षों के अपने अथक संघर्षों से हमें ये स्वतंत्रा दिलाई। उन घोर अमानवीय यातनाओं के याद करने का दिन जो हमनें गुलामी के दौर में झेली हैं। ये यादें ही हमें बताती हैं हमें गुलामी का महत्व। ये यादे ही हमें प्रेरित करती हैं मातृ भूमि पर अपने प्राण न्यौछावर करने ...... संघर्ष करने ..... सतर्क रहने ...... दुश्मन को करारा जवाब देने पुरजोर जज्बा देने के लिए। 
आज हम 69 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्त किए 68 साल बित गएं। इस लंबे अर्से में भारत ने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में अनेक ऊंचाईयों को छुआ हैं। भारत की मानसिक आयु ने भी अपना एक ऊंचा मुकाम हांसिल कर लिया हैं। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत का ये सिंहासन लगातर ऊंचा होता जा रहा है। अब हमारे बुजुर्गों ही नहीं, हमारे युवा और उनके पीछे आती किशोरों की पीढ़ी भी हमारी वैचारिक विरासत को अधिक याद करने की बजाय वो वर्तमान और भविष्य पर अधिक चिंतन करना चाहती हैं। पृष्ठ भूमि वाले आधारभूत विषय आज देश के हर तबके के नागरिक के दिल-दिमाग में लगभग स्पष्ट हैं। आज व्यक्ति मेजर की जगह तात्कालीक तौर पर उभरते और उसके हित वाले माइनर विषयों पर अधिक सोचने लगा हैं।
परिपक्वता की दहलीज पर पहुंच चुकी देश के मतदाताओं की मानसिक आयु व्यवस्था को ट्रैक पर लाने के लिए लगातार आगे बढ़ रही हैं। जनता ने ही 2014 में लोकसभा के आम चुनावों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत देकर प्रजातंत्र को पूरा किया। जनता जनार्दन ही हैं जिसने स्वतंत्रता के बाद पहली बार विपक्षी दल बीजेपी को अकेले आशा अधिक बहुमत देकर देश को एक दलीय और वंशानुगत शासन व्यवस्था के श्राप से मुक्त किया है। 1990 के दशक से जो राजनीति में उथल-पुथल (In a Time of Tarbulance) का दौर शुरू हुआ। उसकी मजबूरी वश देश गठबंधन राजनीति की खाई में जा गिरा। विश्व की दौड़ में शामिल होने के लिए इसी समय कांग्रेस के करकमलों से पूर्व प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिंहराव की अगुवाई में देश में शुरू हुआ आर्थिक ग्लोबलाइजेशन। जो कभी पटरी से उतरता तो कभी कभी ट्रैक से पर दौड़ता नजर आया। तभी से आज भी आर्थिक ग्लोबलाइजेशन भारत में अविरल रूप से लगातार ऊंचाईयों की ओर बढ़ रहा हैं। 

ऐसे विपरित समय में पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक सफल खेवनहार की तरह देश को गठबंधन की सफल राजनीति का पाठ पढ़ाकर देश को विपत्ती के महासागर से बाहर निकाल लिया। अटल जी के बाद फिर देश ने गठबंधन सरकार के दो मौन कार्यकाल देंखें। पूरे 10 वर्षों तक उस पर वंशवाद का साया छाया रहा। फिर भी वो देश के लिए अतुलनीय रूप से सफल रहा। उसने भले ही रेल तेज नहीं दौड़ायी लेकिन हमारी गाड़ी को ट्रैक से उतने नहीं दिया। परिवर्तन के प्रारंभिक दौर में स्वभावत: अपने हित साधने वालों ने जरूर सेंध लगाई जिससे बदनामी भी ज्यादा सामने उभरकर सामने आयी। इस दौरान विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र ने वंश विशेष के साथ स्वतंत्र शासक के अदभूत समन्वय को देखा। भले ही मौन के बल पर समय आगे बढ़ा हो। तथाकथित रूप से लगभग ही सही, मगर देश का वो विपरीत समय भी दुनियां की मैराथन में शामिल रहते हुए, आगे निकलने के पुरजोर प्रयास के साथ, मौन देश के शासन को इस विपत्ती के समय से बाहर निकाल ले आया।

अब 2014 के आम चुनावों में जनता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी को रिकॉर्ड बहुमत देते हुए उस पर गुरूत्तर दायित्व डालकर भरोसा जताया हैं। जिन वादों को लेकर वर्तमान सरकार अस्तित्व में आयी थी, उन्हें कारगर करने प्रतिध्वनि तो बहुत ऊंची सुनाई दे रही हैं। यदि ये मधुर ध्वनि धरातल पर आयी तो हम दुनिया की अगुवाई करते नजर आयेंगे। विश्व गुरू रहे भारत का सपना एक बार फिर होगा। आज संसार के सभी लोगों की नजरें भारत के ऊपर हैं। प्लीज कम एण्ड मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, विदेशों में जमा काले धन की पाई-पाई घर आने की आशा, प्रभावशाली बनने के लिए आगे बढ़ती हमारी विदेश नीति, सरकारी कोष में जमा होने वाले धन का बढ़ता ग्राफ और दहाड़ से घबरा रही महंगाई वाले हमारे साहसी बोल हमारे सुनहरे भविष्य की राह खोल रहे हैं, कहे या खोल सकते हैं। अभी कहना मुमकिन नहीं। इन्हें भविष्य पर छोड़ने के अलावा अभी कोई रास्ता नहीं। आम लोगों के लिए देश में महंगाई घबराने की बजाय टस से मस न होकर अपने कदम आगे ही बढ़ा रही हैं। 
भ्रष्टाचार ने तो लगता है व्यवस्था में सारे मूल्यों को ही निगल लिया हैं। घुस लेने वाले से ज्यादा देने वाला खुश हो रहा हैं। लेने वाला तो घबराता भी है लेकिन देने वाला केवल अपना हित चाहता है। उसे चाहिये कम खर्चें में बिना लंबी प्रक्रिया में पड़े शीघ्र काम। देने वाले की इस दोहरी मनोवृत्ती पर लगाम लगे बिना सरकार के लिए भ्रष्टाचार पर विजय हांसिल करना दुष्कर ही नहीं मगर कठिन अवश्य है। एक ओर व्यक्ति गलत कामों के सहारे ही सहीं, मगर हर हाल में आगे बढ़ना चाहता हैं। दूसरी ओर वो भ्रष्टाचार के लिए सरकार को कोसता हैं। लगता है ये व्याधि तब तक दूर नहीं हो सकती जब तक समाज के हर लोगों में व्यक्तिगत तौर पर नैतिक संवेदनाएं नहीं जागती हैं। हमें एक जुट होकर हर जगह बुराई का विरोध करना चाहिये। आवाज उठाना चाहिए। चाहे बुराई किसी भी रूप में हो। दिल्ली की आप सरकार सार्वजनिक स्थलों पर हो रही बुराई के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने की पहल के लिए  आह्वान कर रही है। जिसे पूरे देश में आगे बढ़ना चाहिए। आज दिवस देखना चाहता है सभी एक दूसरे की अच्छी पहल का स्वागत करें, देश में समनव्य की संस्कृति हो।
इसमें दो राय नहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहले रोजगार की गारंटी को कानून में बदलकर देश को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी एक्ट दिया। इसके बाद देश को सूंचना अधिकार अधिनियम आरटीआई देकर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने वाला साहसी कदम उठाया। इसी क्रम में देश के बच्चों के लिए शिक्षा के मूल अधिकार को कठोरता से क्रियान्वित करने शिक्षा का अधिकार अधिनयम लाकर अमह कदम उठाया। अपनी स्थिति को भापकर आखिर में जाते-जाते ही सही कांग्रेस देश को भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनिय और भारतीय लोकपाल अधिनियम दें गईं। कांग्रेस लोक कल्याण के साथ-साथ हमारे प्रजातंत्र के लिए मील का पत्थर साबित होने वाले इन कदमों का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाली सरकार पर छोड़ गई। देश की जनता अब बीजेपी से इन अहम विषयों को जमीन पर लाने के साथ-साथ कांग्रेस द्वारा उठाए गये इन कदमों से भी बेहतर कानूनी प्रबंध की आशा कर रही हैं। आज नवीन सरकार को बने एक साल से अधिक का समय गुजर गया, अभी देश केवल गूंज सुन रहा है। एक ओर देश अपने आपको आत्मविश्वास से लबरेज महसूस कर रहा है, तो दूसरी ओर देश के लोग उठाये गयें कदमों की आहट सुनने के सुनने के साथ-साथ, उसे महसूस करने के लिए बेसब्री से लालायित हैं। लोकपाल बनाने के लिए अधिनियमित की गई एक साल की समय सीमा के चले जाने के बाद भी देश को लोकपाल की नियुक्ति के लिए आवाज तक सुनाई नहीं आ रही है।
 आज उसी अण्णा हजारे को जिसे बीते एक समय आज का गांधी पुकारा जाने लगा था, उनकी लंबी-लंबी चिठ्ठियों के जवाब एक लाइन में मिल रहे हैं। सचमुच उस समय गांधी के बाद कोई तो मुखौटा आया जिसके साथ पूरा देश एक स्वर में खड़ा था। उनके एक आह्वान पर थोड़ी देर के लिए शाम के समय सारे देश में एक साथ अंधेरा छा गया और मोमबत्तीयां जल उठी। बिना भेद-भाव, ईर्ष्या-द्वैष, स्वैच्छा से हर तबकें, न कोई गरीब, न कोई अमीर सभी के सामने एक ही निर्विवाद आवाज। जनता सड़कों पर उमड़ पड़ी। देश में पिन ड्राप साइलेंस। सभी कर्ताधर्ता सन्न। क्या आरएसएस, बीजेपी, कांग्रेस, समाजवादी, कम्यूनिष्ट या अन्य क्षेत्रीय दल हम सब उनके साथ। विडंबना ये धरोहर हम संजो नहीं पायें। आगे नहीं बढ़ा पायें। महत्वाकांक्षाओं ने उसे तितर-बितर कर दिया। मानव शांति के अस्तित्व के लिए खतरा बना आतंकवाद लगातार हमें चिड़ाने के प्रयास कर रहा हैं। हमारी विदेश नीति की अधिकांश चर्चा पाकिस्तान के ही ईर्द-गिर्द घुम रही है। दूसरी ओर लंबे समय से आतंकवाद की पीड़ा झेल रहे जम्मू एण्ड कश्मीर की सरकार में पीडीपी और बीजेपी का बेमेल हमारे दिमाग के परे लगता है। पाक आतंकवादी हमारे निर्दोष लोगों की जान लेने के लिए हर कभी हमारे देश में चले आते हैं। उन्हें हम जिन्दा पकड़े या मुर्दा। पड़ोसी उसे अपने यहां के नागरिक होने से इंकार कर देता है। साक्ष्यों को तो वो धता दिखाता हैं।  
संसद हो या विधान सभाएं हमारी विधायिकाएं प्रासंगिक बहस की जगह संख्या बल की राजनीति अधिक करने लगी हैं। समय से पहले सत्रावसान होना। सदन को चलने से बाधित करना। विशेज्ञता के इस युग में तकनीकी पर आधारित बहस की जगह राजनीतिक विषयों की बहस पर ही सदन का समय गवा देना। राजनीति दलों में अतिशय अनुशासन की सीमा के चलते बड़े पैमाने पर डम्प पार्लियामेंट, डम्प विधान सभाओं के बढ़ते अस्तित्व जैसे अनेक विषयों ने आम लोगों को चिंता में डाल दिया हैं। सभी अपनी – अपनी बात उचित ठहराने में लगे हैं। जिन्होंने मूल्य आधारित जनजीवन की बहतरी के लिए विपक्ष में रहकर लंबे समय तक संघर्ष किया वो भी और जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद से आज तक सत्ता सुख भोगा वो भी। सभी एक ट्रैक पर। प्रजातंत्र के पूरा होने पर आज भी हम वो ही देख रहे हैं, जो विगत 65 सालों से देखते आ रहे हैं।
  
चारों ओर सुषमा-वसुंधरा-शिवराज के नाम का हो हल्ला। जनता को सच्चाई कुछ सूझ नहीं रहीं। क्या विवादों में आयी किसी धरोहर को बचाना इतना जरूरी हैं। या किसी को जांच की भट्टी में तपाकर उसे कंचन बनाकर निकालना। कहीं वहीं तो नहीं हो रहा जो 65 सालों से कांग्रेस करती आयी। वो भी तब जब बीजेपी जैसा मूल्य आधारित राजनीतिक दल सत्ता में हैं। जनसंघ के काल से मूल्य आधारित राजनीतिक दल की दुहाई दे रहें बीजेपी में उसी कांग्रेस के कार्यकर्ता धड़ल्ले से आ रहे हैं। जिसके मूल्यों के विरोध में हमने संघर्ष किया। लगता है अब इस अवसरवादी विपरित प्रवाह ने चुनावी जीत को सर्वोपरी बना दिया हैं। मूल्य बीतें दिनों की बात बनकर रह गएं। गलत काम करने वाला एक व्यक्ति ललित मोदी विदेश में बैठकर निडरता से एक से बढ़कर एक आरोप सभी दलों के हमारे कर्ताधर्ताओं पर लगा रहा हैं। हमारी व्यवस्था की कमियों को उजागर कर स्वच्छ बनाने की चाह रखने वाले हमारे व्हीसिल ब्लोअर अपनी जान की सुरक्षा गारंटी की कमी के चलते बड़े पैमाने पर एक्टिव होकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। सरकार के लिए व्हीसिल ब्लोअर की सुरक्षा और उनके द्वारा होने वाले संभावित दुरूपयोग के बीच संतुलन बिठाना कठिन हो रहा हैं। देश इस पर सरकार के किसी कड़े कदम उठाने की आशा कर रहा है।    

 कांग्रेस के आखिर समय में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कालेधन की जांच के लिए एसआईटी बनाने के निर्देश के क्रियान्वयन के अलावा कालेधन पर कोई सीधा फायदा आम जनता को पहुंचता नजर नहीं आ रहा हैं। पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाली जनसंप्रभु सत्ता प्राप्त संस्था विशालकाय संसद की जगह न्याय पालिका अधिक सक्रिय नजर आ रही है। पूरे देश की आशाएं अब लगता हैं देश की न्याय पालिका पर ही आ टिकी हैं। न्याय पालिका अपने ऊपर आये दायित्व की भूमिका बखूबी निभा रही हैं। उस पर देश को फक्र ही नहीं पूरा विश्वास भी है। हमारी विधायिकाओं को इस विसंगति को दूर करने के लिए अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। मतदाता अपना काम अच्छी तरह कर रहे हैं। संभवत: अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बिहार विधान सभा के चुनावों में विजय का सेहरा स्पष्ट बहुमत के साथ बीजेपी के सिर बांध दे तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गठबंधन की जगह बिहार की स्पष्ट विजय भारतीय प्रजातंत्र के सिर पर ताज चढ़ाने जैसा ही होगा। जो आज का जागरूक मतदाता ही कर सकता हैं।

इसी साल के आखिर में पश्चिम बंगाल की विधान सभा के होने वाले आम चुनावों में मतदाता बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देकर भारत के प्रजातंत्र के ताज में किंगपिन लगाकर भारतीय प्रजातंत्र को विश्व सिंहासन पर बैठाने के लिए आगे बढ़ा सकते हैं। मतदाता ही हैं जिसने पहले पश्चिम बंगाल में 40 वर्षों से चले आ रहें कम्युनिष्टों के एक छत्र राज को उखाड़ फेंक प्रदेश की बागडौर ममता बैनर्जी की पार्टी तृण मूल कांग्रेस को सौंपी। अब आगामी चुनावों में बंगाल की जनता अपने प्रदेश की सत्ता राष्ट्रीय राजनीतिक दल बीजेपी के हाथों में देकर अपना राष्ट्रीय कर्तव्य पूरा कर सकती हैं। इसी के साथ हमारे दायित्व में भी बहुत अधिक गुरूत्तर वृद्धि होगी। अहम के चलते विजय को हल्के में लेने के नतीजे के संकेत भी प्रजातंत्र दिल्ली में ऐतिहासिक बहुमत देते हुए आप की सरकार बनाकर दें चुका हैं। जनता ने दी इस ऐतिहासिक विजय के बाद से दिल्ली में जो कुछ जंग की नजीब खींची जा रही है। वो शायद जनता को भा नहीं रही। दिल्ली दूसरों को सौंपकर तो जनता ने केवल लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को धरातल पर लाया है।
                      
 प्रजातंत्र में विपक्ष की भी उतनी ही अहम् भूमिका होती है, जितनी सत्ता पक्ष की। दृड़ इच्छा शक्तिशाली वाला विपक्ष सत्ता को विरोध के साहारे सतर्क-सजग रखकर प्रजातंत्र को पूरा करता है। स्वतंत्रता के बाद गांधी जी ने तो भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की सार्वभौम धरोहर को संजोकर रखने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक राजनीतिक दल बनाने का विरोध किया था। गांधी जी का कहना था भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की ये विरासत भारत को युग-युग तक एकत्व के साथ संघर्ष करने की प्रेरणा देती रहेंगी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लंबे संघर्ष से मिली मूल्यों की ये दुर्लभ धरोहर कभी राजनीतक तौर पर भी लांछीत नहीं होगी। अनेकता में एकता रखने वाले भारत के हर नागरिक के लिए एक समान सम्मानीय, अनुकरणीय होगी। भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक राजनीतिक दल में बदलने के बाद भी गांधी जी ने कईं बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को समाप्त करने की बात उठाई थी। लेकिन अवसरवादियों के सामने गांधी जी की एक नहीं चली।
 गांधी जी के इस दूरगामी विचार को बीजेपी ने अपने प्रचार तंत्र के अंग में भी शामिल किया है। ऐसे में देश की राजधानी में आप के साथ चल रही बीजेपी की खटपट की कैसे आशा की जा सकती है। देश के मूल्यों की अनदेखी से रसातल में पहुंच चुकी कांग्रेस के विकल्प के तौर पर आप उभरने को बेताब हो रही है, तो होने दिया जाय। दिल्ली में आप की विजय कोई हमारी पराजय न होकर लोकतंत्र में मिलने वाले संकेत के समान हैं। 
हाल ही में सरकार द्वारा कुछ अश्लील वेबसाइटों को बंद करने और मुम्बई बम धमाकों के आरोपी को फांसी देने के बाद कवरेज करने वाले कुछ टी.वी. चैनलों को नोटिस दिए जाने के कारण हमारा विरोध गलत हैं। अश्लील वेबसाइटों को बैन कर सरकार ने ऐसा क्या गलत कर दिया। इससे हमारे बच्चें और संस्कृति दोनों ही सुरक्षित हुए हैं। वहीं सांप्रदायिक सदभाव बिगड़ने की संभावना के चलते संवेदनशील कवरेज बैन होने से तो कोई अनचाही अनहोनी ही निर्मूल हुई है। ऐसी सकारात्मक सोच ही हैं जो हमारे देश को ऊंचाईयों पर ले जायेंगी। हम सीना फुलाकर गर्व से कह सकेंगे हम हैं भारतवासी ........... ! एक साथ सारे देशवासियों का राष्ट्र ध्वज को सैल्यूट ..........!  सदा लहराता रहे हमारा अमर तिरंगा ......... !
(इदम् राष्ट्राय स्वा: , इदम् राष्ट्राय, इदम् न मम् ..... !)